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उत्तरकाशी में CSAM पर जीरो टॉलरेंस: 14 केस दर्ज, SP कमलेश उपाध्याय ने बच्चों और अभिभावकों को किया सतर्क

जन एक्सप्रेस /उत्तरकाशी :- डिजिटल युग में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तरकाशी पुलिस ने बच्चों से संबंधित अश्लील/यौन शोषण सामग्री (CSAM) के मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। जिले में ऐसे मामलों में अब तक 14 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का निर्माण, संग्रहण, डाउनलोड या सोशल मीडिया पर साझा करना गंभीर और दंडनीय अपराध है।

पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने कहा कि यह केवल एक साइबर अपराध नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य, उनकी गरिमा और समाज की नैतिकता पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे की अश्लील फोटो या वीडियो बनाना, अपने पास रखना, डाउनलोड करना या व्हाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करना कानूनन अपराध है।

एसपी ने विशेष रूप से युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति जिज्ञासावश, मजाक में या बिना किसी गलत मंशा के भी ऐसी सामग्री को डाउनलोड, संग्रहित या आगे भेजता है, तब भी उसे गंभीर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। दोस्तों के ग्रुप में ऐसी सामग्री साझा करना भी अपराध की श्रेणी में आता है और इससे भविष्य तथा करियर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

पुलिस की आमजन से अपील

उत्तरकाशी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास गलती से भी ऐसी कोई सामग्री पहुंचती है, तो उसे किसी भी स्थिति में आगे फॉरवर्ड न करें। इसके बजाय संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसकी रिपोर्ट करें और तुरंत पुलिस को सूचित करें।

शिकायत दर्ज कराने के लिए नागरिक साइबर हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल अथवा अपने नजदीकी थाने से संपर्क कर सकते हैं।

अभिभावकों और स्कूलों की भूमिका अहम

एसपी कमलेश उपाध्याय ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, ऑनलाइन गोपनीयता और साइबर अपराधों के प्रति नियमित रूप से जागरूक करें। साथ ही बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर सकारात्मक और जिम्मेदार निगरानी रखें।

पुलिस ने सभी स्कूलों से भी अपेक्षा की है कि वे समय-समय पर छात्रों के लिए साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन अपराधों से बचाव संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें।

उत्तरकाशी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अपराधों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

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