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बेरीनाग-नरगोली सड़क पर ग्रामीणों की मानव श्रृंखला, डामरीकरण की मांग सांसद के आश्वासन पर खत्म हुआ प्रदर्शन

जन एक्सप्रेस /पिथौरागढ़:- बागेश्वर सीमा से लगे बेरीनाग क्षेत्र में लंबे समय से बदहाल बेरीनाग-पौषा-पोस्ताला-चंतोला-नरगोली मोटर मार्ग के डामरीकरण की मांग को लेकर रविवार को ग्रामीणों ने मानव श्रृंखला बनाकर जोरदार प्रदर्शन किया। पौषा-पोस्ताला और कमस्यार घाटी क्षेत्र के दर्जनों गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने सड़क पर खड़े होकर नारेबाजी की और जल्द डामरीकरण शुरू कराने की मांग उठाई।

ग्रामीणों का कहना है कि नरगोली-बेरीनाग मोटर मार्ग लंबे समय से डामरीकरण के अभाव में बदहाल है। बरसात के दौरान सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और कीचड़ होने से आवाजाही मुश्किल हो जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर मरीजों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और रोजाना आवागमन करने वाले ग्रामीणों पर पड़ रहा है।

आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने समाप्त किया आंदोलन

प्रदर्शन की सूचना पर प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और पीएमजीएसवाई के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क की बदहाली को लेकर जवाब मांगा। सांसद और विधायक की ओर से दिए गए आश्वासन तथा विभागीय स्तर पर लिखित कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल आंदोलन समाप्त कर दिया।

ग्रामीणों के अनुसार सांसद ने एक माह के भीतर टेंडर प्रक्रिया शुरू कराने और अक्टूबर तक सड़क का काम कराने का भरोसा दिया है। ग्रामीणों ने कहा कि अब उनकी नजर विभागीय कार्रवाई पर रहेगी। यदि तय समय में काम शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन दोबारा तेज किया जाएगा।

दो दशकों से सड़क के डामरीकरण की मांग

ग्रामीणों का आरोप है कि बेरीनाग-पौषा-पोस्ताला-चंतोला-नरगोली मार्ग को बेहतर बनाने की मांग पिछले करीब दो दशकों से उठाई जा रही है। इस दौरान ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग के अलावा स्थानीय विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री और सांसद तक कई बार ज्ञापन भेजे, लेकिन सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

करीब 8 किलोमीटर लंबा यह मार्ग पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक इस सड़क से जुड़े गांवों के लिए बेरीनाग स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और व्यापार का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति का सीधा असर दोनों जिलों के सीमावर्ती ग्रामीणों पर पड़ रहा है।

लोनिवि से पीएमजीएसवाई को दी जा रही जिम्मेदारी

ग्रामीणों के अनुसार सड़क के नए सिरे से निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग से हटाकर पीएमजीएसवाई को दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि आंदोलन की चेतावनी के बाद विभाग की ओर से प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को भेजने की कार्रवाई की गई।

ग्रामीणों ने कहा कि सड़क की समस्या नई नहीं है और अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि धरातल पर काम शुरू होने का इंतजार है।

बागेश्वर सीमा तक सड़क बेहतर, पिथौरागढ़ क्षेत्र में बदहाल

ग्रामीणों का कहना है कि बागेश्वर जिले की सीमा तक सड़क अपेक्षाकृत बेहतर और चौड़ी है, लेकिन पिथौरागढ़ जिले की सीमा में प्रवेश करते ही मार्ग की स्थिति खराब हो जाती है। इस कारण स्थानीय लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है।

कमस्यार घाटी के करीब दो दर्जन गांवों के लोगों के लिए बेरीनाग प्रमुख बाजार और सेवाओं का केंद्र है। बड़ी संख्या में ग्रामीण रोजाना स्वास्थ्य सेवाओं, बैंकिंग, शिक्षा और व्यापार से जुड़े कामों के लिए बेरीनाग पहुंचते हैं।

‘बड़ी दुर्घटना का इंतजार तो नहीं?’

ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली को लेकर दुर्घटनाओं की आशंका भी जताई। उनका कहना है कि मार्ग पर वाहन चलाना तो दूर, कई जगह पैदल आवाजाही भी मुश्किल हो जाती है। खराब सड़क के कारण 108 एंबुलेंस और रसोई गैस जैसे जरूरी वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होने का दावा ग्रामीणों ने किया।

ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी वाहन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में सड़क की स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन के सक्रिय होने का इंतजार क्यों किया जाए।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद

मानव श्रृंखला और प्रदर्शन में अध्यक्ष डीआर टम्टा, विनोद महरा, व्यापार संघ अध्यक्ष राजेश रावत, सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश बोरा, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष दीपक राठौर, महेश राठौर, अनिल रौतेला, भगवान महरा, सुनील रावत, हरीश डसीला, भाष्कर कुमार, भगवत सिंह रौतेला, हयात डसीला, भगवान खाती, गोपा धपोला, सरोज आर्या, मनोज रौतेला समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

मौके पर बेरीनाग तहसीलदार दयाल चंद्र मिश्रा, लोक निर्माण विभाग और पीएमजीएसवाई के अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि एक माह के भीतर टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और अक्टूबर तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ, तो वे दोबारा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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