
जन एक्सप्रेस /उत्तरकाशी :- इंसानियत के सच्चे मसीहा उत्तरकाशी में डॉ. विजेन्द्र पोखरियाल बेसहारा, मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को अपने हाथों से नहलाते हैं, बाल काटते हैं, कपड़े पहनाते हैं जब समाज का बड़ा वर्ग फल-भोजन बांटकर फोटो खिंचवाने को ही सेवा समझ लेता है, तब उत्तरकाशी में चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति उत्तराखंड के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और ख्याति प्राप्त राज्य आंदोलनकारी डॉ. विजेन्द्र पोखरियाल सेवा की ऐसी मिसाल पेश कर रहे हैं जिसे पूरा समाज सलाम करता है। वे वर्षों से उन बेसहारा, जरूरतमंद और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की सेवा में जुटे हैं, जिनके पास जाने में लोग संकोच करते हैं, जिनके बाल इतने बढ़े होते हैं कि नाई भी पास आने से हिचकिचाता है। डॉ. पोखरियाल खुद आगे आकर अपने हाथों से उन्हें नहलाते हैं, साफ-सफाई कराते हैं, कपड़े पहनाते हैं और बालों की कटिंग तक करते हैं। कोरोना महामारी के भय के दौर में भी उनके कदम नहीं डिगे, क्योंकि उनका मानना है कि मुसीबत में पड़े इंसान को अकेला छोड़ना समाधान नहीं है।
यह सेवा किसी एक दिन या विशेष अवसर तक सीमित नहीं है, यह वर्षों की निरंतर साधना है और बताती है कि इंसान की पहचान कपड़ों, स्थिति या मानसिक अवस्था से नहीं बल्कि भीतर की इंसानियत से होती है। डॉ. पोखरियाल का कहना है कि सेवा में बड़ा-छोटा कोई नहीं और उन लोगों को भी सम्मान मिलना चाहिए जिन्हें परिस्थितियों ने सबसे पीछे धकेल दिया है। उत्तरकाशी की धरती से उठी यह प्रेरणा आज राष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़ी करती है कि क्या हम केवल सक्षम लोगों के साथ खड़े होंगे या उन हाथों को भी थामेंगे जिन्हें हमारी सबसे ज्यादा जरूरत है, और यही वह उच्च मूल्यवान आदर्श सेवा है जो समाज में वफादारी, संवेदना और सच्ची लगन पैदा करती है।






