उत्तराखंडनैनीताल

प्रयागराज के अखिलेश पांडे बैसाखी के सहारे पहुंचे कैंची धाम, बोले– बाबा से मिल गया नया संबल

व्हीलचेयर हो या बैसाखी, नहीं रुकती आस्था: बाबा नीम करौरी के दर पर हर हाल में शीश नवाते हैं भक्त

जन एक्सप्रेस/नैनीताल(उत्तराखण्ड) : देश-दुनिया में श्रद्धा और चमत्कार के प्रतीक बन चुके बाबा नीम करौरी महाराज के प्रति लोगों की आस्था किस हद तक गहराई तक पैठी है, इसका अद्भुत उदाहरण इस बार कैंची धाम में देखने को मिला। श्रद्धा ऐसी कि व्हीलचेयर हो या बैसाखी… न कोई दूरी आड़े आई, न बीमारी की बेड़ियाँ। बस, एक ही लक्ष्य—बाबा के दर पर शीश नवाना।

राजस्थान के कारोबारी मुकेश अग्रवाल, जो कई वर्षों से नसों की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, अमेरिका तक इलाज करवा चुके हैं लेकिन विशेष लाभ नहीं मिला। फिर भी हौसला नहीं टूटा। वे व्हीलचेयर पर ही सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर कैंची धाम पहुंचे। बाबा के चरणों में माथा टेकते हुए उनकी आंखें नम थीं—लेकिन मन में थी शांति और विश्वास।

वहीं प्रयागराज से आए अखिलेश पांडे, जो चलने के लिए बैसाखी का सहारा लेते हैं, बोले—”मैं बाबा के बुलावे पर आया हूँ। शरीर थका हुआ है लेकिन आत्मा को ऊर्जा मिल रही है। ऐसा लगता है जैसे बाबा ने ही खींच लिया है।”

कैंची धाम स्थित बाबा नीम करौरी का यह पावन स्थल उत्तराखंड के अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे पर स्थित है। हर साल 15 जून को होने वाले स्थापना दिवस से पहले लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां पहुंचते हैं।

कैंची धाम की खासियत यह है कि यहां सिर्फ दर्शन नहीं होते—यहाँ श्रद्धा के साथ ऊर्जा मिलती है, संबल मिलता है। बाबा के दरबार में हर भक्त को अपने मन का उत्तर मिल जाता है।

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