जौनपुर: विद्वता का एक युग समाप्त, पूर्व प्रवक्ता व कर्मकांड के मर्मज्ञ पंडित रामप्यारे द्विवेदी का निधन

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: जौनपुर जिले के खुटहन क्षेत्र के अंतर्गत दौलतपुर गांव के निवासी, पूर्व प्रवक्ता और कर्मकांड के प्रकांड विद्वान पंडित रामप्यारे द्विवेदी का रविवार को उनके पैतृक आवास पर निधन हो गया। वे 95 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और शिक्षा व धार्मिक जगत के लोग स्तब्ध रह गए।
‘गुरु बाबा’ की उपाधि से थे सम्मानित
पंडित रामप्यारे द्विवेदी केवल एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक व्यक्तित्व के धनी थे। उन्हें परमहंस आश्रम धारकुंडी से ‘गुरु बाबा’ की मानद उपाधि प्राप्त थी। उनका जीवन सादगी, विद्वता और संस्कारों का एक जीवंत उदाहरण था।
शिक्षा और कर्मकांड में महत्वपूर्ण योगदान
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शिक्षण कार्य: लंबे समय तक प्रवक्ता के पद पर रहते हुए उन्होंने हजारों छात्रों का भविष्य संवारा और समाज में शिक्षा व नैतिक मूल्यों का प्रसार किया।
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वैदिक विद्वान: उन्हें वैदिक कर्मकांड का गहन ज्ञान था, जिसके कारण उनकी ख्याति न केवल जौनपुर बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों में भी थी। लोग उनके ज्ञान और सरल स्वभाव के कायल थे।
मणिकर्णिका घाट पर अंतिम विदाई
उनके निधन की सूचना मिलते ही उनके दौलतपुर स्थित आवास पर शुभचिंतकों और ग्रामीणों का तांता लग गया। हर कोई अपने ‘गुरु बाबा’ के अंतिम दर्शन के लिए व्याकुल दिखा। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार मोक्षदायिनी नगरी वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया गया। इस दौरान भारी संख्या में मौजूद परिजनों, शिष्यों और गणमान्य नागरिकों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
पंडित रामप्यारे द्विवेदी का निधन समाज के लिए एक ऐसी रिक्तता है जिसे भर पाना कठिन होगा। उनके द्वारा स्थापित आदर्श और संस्कार आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।






