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चित्रकूट में थानों की बोली लगी! — बदले थानेदार, नहीं बदला सिस्टम

भ्रष्टाचार का खुला खेल… ग्रामीण बोले – “थाने बिक रहे हैं, न्याय नहीं मिल रहा!”

जन एक्सप्रेस /चित्रकूट (हेमनारायण हेमू): चित्रकूट जनपद में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि अब थानों में कानून नहीं, रुपयों की गूंज सुनाई देती है। सूत्रों की मानें तो हाल ही में थानेदारों के तबादले के साथ ही पैसे के लेनदेन के “रेट” भी बदल गए हैं। यानी थाना बदला, मगर सिस्टम वहीं का वहीं है — सड़ा हुआ और रिश्वतखोरी से लथपथ।

भ्रष्टाचार का खुला खेल… ग्रामीण बोले – “थाने बिक रहे हैं, न्याय नहीं मिल रहा!”

गांव-गांव में चर्चा है कि चित्रकूट के थानों में खुलेआम दलाली हो रही है।
गरीब आदमी थाने के चक्कर काटते-काटते चप्पलें घिसा लेता है, लेकिन न्याय फिर भी नहीं मिलता।
ग्रामीणों का कहना है कि थानेदार बदलने से भ्रष्टाचार नहीं रुका, बल्कि अब तो “रेट लिस्ट” नई हो गई है।

जनप्रतिनिधियों पर भी गंभीर सवाल

चित्रकूट के जनप्रतिनिधियों पर भी जनता का गुस्सा फूट पड़ा है।
लोगों का कहना है — “जो खुद गैरकानूनी कारोबार में लिप्त हैं, वो भला भ्रष्टाचार पर लगाम कैसे लगाएंगे?”
आज तक किसी विधायक या सांसद ने थानों में बढ़ती घूसखोरी पर आवाज नहीं उठाई।
ना किसी ने ट्रेज़री घोटाले पर सवाल किया, ना पुलिस विभाग की लूट पर बयान दिया।

“सोशल मीडिया पर नहीं दिखती हिम्मत”

जनता का कहना है —

हमने जिन्हें नेता चुना, वो हमारी आवाज बनने के बजाय अपने व्यापार की ढाल बने बैठे हैं।”
“कोई नेता सोशल मीडिया पर नहीं कहता कि भ्रष्टाचार बंद करो… बस अपने धंधे में आंच न आए यही चिंता है।”

युवाओं का आह्वान — “अब बहिष्कार का वक्त आ गया”

चित्रकूट के युवा अब जाग रहे हैं।
वे कह रहे हैं कि अब “ऐसे नेताओं का बहिष्कार जरूरी है जो जनता की नहीं, अपने व्यापार की राजनीति करते हैं।”
अगर यही हाल रहा, तो जनता का सब्र का बांध टूटना तय है।

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