ब्रम्हलीन सच्चिदानंद महाराज को सोमवार को दी जाएगी भू -समाधि,कल होंगे अंतिम दर्शन

जन एक्सप्रेस/चित्रकूट ( सचिन वन्दन):देश के प्रसिद्ध संत धारकुण्डी आश्रम के पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज 102 वर्ष की आयु में ब्रम्हलीन हो गए। शनिवार की दोपहर मुंबई में पूज्य स्वामी जी का देवलोकगमन होने का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। मुंबई में उपचार के दौरान उन्होंने देह का त्याग किया है। महान संत परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज के ब्रह्मलीन होने से आध्यात्मिक जगत में शोक की लहर है। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने सतना जिले के यूपी-एमपी बॉर्डर पर घनघोर और निर्जन वन में कठोर तप, साधना कर धारकुंडी आश्रम को आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित किया था। ब्राम्हलीन पूज्य स्वामी जी का देह मुंबई से धारकुण्डी आश्रम लाया जा रहा है, जहाँ रविवार को दर्शन के बाद उन्हें सोमवार को विधि विधान से नवनिर्मित समाधि स्थल पर समाधि दी जाएगी। इस समाचार के बाद स्वामी परमहंस सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग आश्रम पहुंच चुके हैं। इधर प्रशासनिक अधिकारी भी अंतिम दर्शन की व्यवस्थाओं और समाधि की तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। स्वामी सच्चिदानंद महाराज का जीवन और उनका आध्यात्मिक संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
गणेश द्वारा से प्रवेश कर शिव द्वार से होंगे बाहर
धारकुण्डी आश्रम के गणेश द्वार से श्रद्धालु प्रवेश करेंगे और अंतिम दर्शन के कर शिव द्वार से बाहर निकलेंगे। आश्रम प्रबंधन और प्रशासन पूरी व्यवस्था बनाने में जुटा है। आश्रम प्रबंधन द्वारा भारी भीड़ पहुंचने की सम्भावना जताई जा रही है। आश्रम प्रबंधन ने जानकारी दी है कि धारकुंडी आश्रम में सोमवार को उनके समाधि स्थल पर विधि- विधानपूर्वक समाधि दी जाएगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालुओं के उपस्थित रहने की संभावना है।
प्रशासनिक अमला तैयारियों में जुटा
सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से सतना जिले का प्रशासनिक हमला पूरी तैयारी में जुटा हुआ क्योंकि पूज्य स्वामी सच्चिदानंद महाराज के अंतिम दर्शन के लिए भारत देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में शिष्यगणों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। सूचना के बाद सतना एसपी हंसराज सिंह, मानिकपुर एसडीएम मो. जसीम, चित्रकूट विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार उपजिलाधिकारी मझगवां महिपाल सिंह ने धारकुण्डी आश्रम पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। वहीं बिरसिंहपुर तहसीलदार शैलेन्द्र शर्मा,धारकुण्डी थाना प्रभारी शैलेन्द्र पटेल सहित अन्य प्रशानिक अमला धारकुंडी आश्रम पहुंच कर अंतिम दर्शन की तैयारी में जुटा है। वहीं चित्रकूट के एसडीओपी चित्रकूट ने भी धारकुण्डी पहुंचे हैं।
दर्शन के लिए धारकुंडी पहुंचे अड़गड़ानंद महाराज
ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी सच्चिदानंद महाराज के गुरु भाई अड़गड़ानंद महाराज हेलीकॉप्टर द्वारा धारकुंडी आश्रम पहुंचे जहां रविवार को ब्रह्मलीन गुरु भाई परमहंस सच्चिदानंद महाराज के दर्शन कर समाधि कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
1956 में धारकुण्डी आए थे स्वामी जी
अनुसुईया महाराज के नाम से विख्यात पूज्य स्वामी परमानंद महाराज के शिष्य ब्रह्मलीन परमहंस सच्चिदानंद महाराज आज से तक़रीबन 70 वर्ष पूर्व घनघोर और निर्जन वन में तप, साधना के लिए धारकुण्डी आए थे। उनका गुरुद्वारा सती अनुसूईया आश्रम है, यह स्थान चित्रकूट धाम के निकट घनघोर जंगल में स्थित है। यहीं से उन्होंने आत्मिक चेतना और सनातन धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया।पूज्य स्वामी जी 22 नवंबर 1956 को अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी परमानंद महाराज के आदेशानुसार इस घने जंगल में साधना के लिए आए थे। धारकुण्डी आश्रम की स्थापना कर अध्यात्म और प्रकृति का अनुपम संगम बना दिया। जिस समय स्वामी जी इस स्थान पर आए यह क्षेत्र पूरी तरह से निर्जन था, लेकिन वर्षों की कठोर साधना और तप के बल पर यह स्थान आज एक विशाल आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित है। वर्तमान में धारकुंडी आश्रम साधना, सेवा, यज्ञ, प्रवचन और सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। आत्मिक शांति पाने और आश्रम को देखने के लिए देश विदेश से लोग आते हैं। प्रकृति की गोद में बसा धारकुण्डी आश्रम की मनोहर छटा हर किसी का मन मोह लेती है।
अध्यात्म, तप और सेवा को समर्पित रहा जीवन
स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, तपस्या,साधना, सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। वे न केवल एक महान संत थे, बल्कि सनातन परंपराओं के सच्चे संवाहक भी माने जाते थे। उनके मार्गदर्शन व आशीर्वाचन से लाखों लोगों ने आध्यात्मिक जीवन की राह अपनाकर आत्मिक शांति की अनुभूति की।
पिछले वर्ष मार्च महीने में आए थे धारकुण्डी
पिछले वर्ष जब सच्चिदानंद महाराज धारकुण्डी आश्रम पहुंचे थे, तब उनके दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। मार्च 2025 में परमहंस सच्चिदानंद महाराज अपने तपोस्थली धारकुंडी आश्रम आए थे। हालांकि स्वामी जी आश्रम में दो से चार दिन ही रुके थे, लेकिन उनके दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से शाम तक उमड़ती थी। लगभग, संत और विशिष्टजन उनसे मिलने पहुंचे थे।






