जफराबाद जंक्शन बना बंजर घास का मैदान, स्वच्छता अभियान की खुली पोल!

जन एक्सप्रेस जौनपुर/ जफराबाद (उत्तर प्रदेश): एक ओर देश के प्रधानमंत्री “स्वच्छ भारत अभियान” को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर जफराबाद जंक्शन जैसे रेलवे स्टेशनों की हालत इस अभियान की सच्चाई को बेनकाब कर रही है। स्टेशन का प्लेटफॉर्म घास-फूस से ऐसे अटा पड़ा है मानो कोई बंजर खेत हो, जहां न सफाई है, न व्यवस्था और न ही जिम्मेदारी का कोई नामोनिशान।
स्थानीय यात्रियों और नियमित सफर करने वालों की मानें तो प्लेटफॉर्म पर चलना तक मुश्किल हो गया है। घास इतनी घनी और लंबी हो चुकी है कि उसमें कीड़े-मकोड़े और सांप तक छिपे हो सकते हैं। बरसात के मौसम में तो हालात और भी खराब हो जाते हैं। फिसलन और गंदगी की वजह से यात्रियों को गिरने और चोट लगने का भी डर बना रहता है। वृद्ध यात्रियों और महिलाओं के लिए ये स्थिति और भी ज्यादा परेशान करने वाली है।
सवाल ये उठता है कि आखिर जिम्मेदार कौन है? रेलवे मंत्रालय हर साल अरबों रुपये का किराया वसूलता है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की हालत जमीनी स्तर पर बेहद खराब है। क्या स्वच्छता केवल विज्ञापन और प्रचार तक ही सीमित रह गई है? क्या रेलवे स्टेशन की सफाई की कोई मॉनिटरिंग नहीं होती? जनता जानना चाहती है कि जो “स्वच्छ भारत” के नारे लगाए जा रहे हैं, वो सिर्फ भाषणों तक ही क्यों सीमित हैं?






