बाल अधिकार अध्यक्षा ने ली आपदा प्रबंधन पर बैठक

देहरादून । आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास अध्यक्षा के नेतृत्व में सचिवालय परिसर में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस विभाग, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबन्धन एवं पुर्नवास विभाग, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायती राज, शहरी विकास विभाग, वन विभाग व परिवहन विभाग सम्मिलित हुये ।
उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डा. गीता खन्ना द्वारा बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिगत आगजनी, भूकम्प, भूस्खलन जैसी आपदाओं से बचाने के लिये कार्यवाही किये जाने को सभी विभागों को निर्देश दिये। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग को निर्देश दिये गये कि वह समस्त प्राइमरी स्कूलों, जूनियर हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों के प्रधानाध्यापक के माध्यम से अग्निशमन की सुरक्षा सम्बन्धी कार्रवाई करेंगें।
विद्यालयों में अग्निशमन सुरक्षा की क्या स्थिति है? उसके अनुसर स्वत: घोषणा प्रमाण पत्र प्राप्त करते हुए उपलब्ध कराये कि उनके यहां सेफ्टी के लिये क्या-क्या प्रयास किये गये है और क्या-क्या इंक्यूविपमेंट्स उनके पास है। अध्यक्ष डा. गीता खन्ना ने आदेश दिया कि जो विद्यालय बिना मानचित्र स्वीकृति के संचालित हो रहे हैं, उनमें मापदण्डों के अनुसार प्रदान की जा रही है अथवा नही की जांच किया जाना आवश्यक है। इस सम्बन्ध में तीन माह में सूचना उपलब्ध कराये जाने के लिए कहा।
अग्निशमन विभाग को भी निर्देश दिये गये है कि प्राइवेट कोचिंग इंस्टिट्यूट, विद्यालय एवं जहां व्यवसायिक गतिविधियों चल रही है जो कि बच्चों से सम्बन्धित हो, उन सब जगहों पर अग्नि सुरक्षा हेतु एनओसी प्रमाण पत्र लिया गया है या नही। बच्चों से सम्बन्धित सभी संस्थानों में एक मुहिम चलाकर सभी मापदण्डों का सत्यापन कराना सुनिश्चित करने को निर्देशित किया। अन्य उपस्थित सभी विभागों को भी बच्चों की सुरक्षा के लिए सभी मापदण्डों को पूर्ण करने को निर्देश दिये गये। बैठक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि अग्निशमन से बचाव के लिए नवीन तकनीकों के उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
बैठक में निवेदिता कुकरेती, डीआईजी, अग्निशमन ने त्यूनी की घटना को मद्देनजर रखते हुए पहाड़ी क्षेत्रों में जलाशयों का निर्माण कराए जाने की बात कही। गैस के सिलेंडर फटने की घटना पर बताया कि सप्लाई कर्मचारी सिलेंडर नही बदले जाते हैं, जिसकी माहवार जांच की जानी आवश्यक है।
उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य दीपक गुलाटी ने बैठक में यह कहा गया कि शिक्षा विभाग जब भी स्कूलों को एनओसी प्रदान करे तो उससे पहले सुरक्षा के सभी मापदण्डों को सुनिश्चित करें। उसके पश्चात ही विद्यालयों को मान्यता निर्गत करें। साथ ही अन्य सम्बन्धित विभागों से समन्वयन स्थापित कर सुरक्षा मानकों के सभी मापदण्डों को सुनिश्चित करने के पश्चात ही कार्यवाही करना सुनिश्चित करें।






