‘शक़’ के नाम पर ‘सजा-ए-मौत’! भीड़ के हाथों एक बेकसूर की जान गई, कानून बनाम भीड़तंत्र की जंग तेज

जन एक्सप्रेस /चित्रकूट : धर्मनगरी चित्रकूट इन दिनों दहशत के साए में जी रही है। चोर-उचक्कों की अफवाहों के बीच आम आदमी ही अब आम जनता की ‘भीड़’ के निशाने पर है। बीते 24 घंटों में दो अलग-अलग घटनाओं में दो संदिग्धों को भीड़ ने पकड़कर पुलिस को सौंपा। वहीं, इससे एक दिन पहले एक निर्दोष महिला को सिर्फ चोरी के शक में इतना पीटा गया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
कब कौन शक़ के घेरे में आ जाए… कोई नहीं जानता!
गुरुवार को पहाड़ी क्षेत्र के चकजाफर गांव में एक युवक को ‘संदिग्ध’ मानकर ग्रामीणों ने पकड़ लिया। मामला शांत भी नहीं हुआ था कि शुक्रवार को शहर कोतवाली क्षेत्र की गल्ला मंडी में एक महिला को संदिग्ध बताकर भीड़ ने घेर लिया। हालांकि, मौके पर पहुंची पुलिस ने महिला को ‘विक्षिप्त’ बताकर मामला रफा-दफा कर दिया।
लेकिन इन घटनाओं के बीच जो सबसे भयावह तस्वीर सामने आई, वो थी कल की दर्दनाक घटना, जहां छत्तीसगढ़ से आई एक महिला, जो अपनी आंखों का इलाज कराने चित्रकूट आई थी, भीड़ की हिंसा का शिकार बन गई। ग्रामीणों ने उसे बच्चा चोर समझ लिया और बिना कुछ सोचे-समझे इतना मारा कि उसकी मौत हो गई।
आंख बनवाने आई थी, आंखें बंद करके लौटी!
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह झोपड़ियों के पास भटक रही थी। इतने में किसी ने बच्चा चोर होने की अफवाह उड़ा दी। कुछ ही मिनटों में भीड़ इकट्ठा हो गई और फिर वह हुआ जिसे ‘भीड़तंत्र की हत्या’ कहा जा सकता है।
पुलिस का रवैया सवालों के घेरे में
हर बार की तरह पुलिस ने एक बार फिर इन मामलों को ‘मानसिक विक्षिप्तता’ की आड़ में दबाने की कोशिश की। सवाल उठता है कि अगर बार-बार ‘विक्षिप्त’ लोग संदिग्ध माने जा रहे हैं, तो प्रशासन उनके लिए क्या कर रहा है? और अगर वे संदिग्ध नहीं हैं, तो क्या हर मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति को भीड़ पीट-पीटकर मार डालेगी?
अब डर लगता है चित्रकूट में घूमने से!
चित्रकूट, जिसे ‘धर्म और शांति की नगरी’ कहा जाता है, अब हिंसा और अफवाहों का केंद्र बनता जा रहा है। क्या यही वो भूमि है जहां राम और भरत ने प्रेम और संयम की मिसाल दी थी? अब यहाँ शक के आधार पर बेकसूरों को पीट-पीटकर मार देना आम होता जा रहा है।






