उत्तराखंड

गोविंद चातक का लोक साहित्य संरक्षण में अतुलनीय योगदान: डॉ कपिल पंवार

जन एक्सप्रेस/श्रीनगर:आखर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा सौरभ होटल, श्रीकोट में डॉ. गोविन्द चातक जी की जयंती के अवसर पर ‘डॉ. गोविन्द चातक स्मृति व्याख्यान’ एवं ‘डॉ. गोविन्द चातक स्मृति आखर साहित्य सम्मान–वर्ष 2024’ समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर गढ़वाली भाषा–साहित्य और रंगकर्म के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए सुप्रसिद्ध गढ़वाली नाटककार एवं रंगकर्मी कुलानन्द घनशाला को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन, डॉ. गोविन्द चातक के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पण से हुआ। मुख्य अतिथि नगर निगम श्रीनगर की मेयर  आरती भण्डारी ने आखर ट्रस्ट की इस पहल की सराहना करते हुए इसे लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में सतत प्रयास बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. मंजुला राणा ने कहा कि डॉ. चातक का लोक साहित्य संरक्षण में योगदान अतुलनीय है और उन्हें वह व्यापक सम्मान मिलना चाहिए था जिसके वे अधिकारी थे।अतिथि वक्ता डॉ. कपिल पंवार ने अपने वक्तव्य में कहा कि डॉ. गोविन्द चातक लोक के बीच रहकर लोक संकलन करने वाले विद्वान थे और इसी कारण वे लोक-संकलक के रूप में एक उत्कृष्ट नाम के रूप में स्थापित हुए। उन्होंने पहाड़ी भाषाओं को बढ़ाने, उनके संरक्षण और संवर्धन के लिए आजीवन कार्य किया। उनका कार्य केवल संग्रह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने उत्तराखंड की भाषिक और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ आधार प्रदान किया।सम्मानित नाटककार श्कलानन्द घनशाला ने आखर ट्रस्ट के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीलम नेगी ने किया तथा अंत में ट्रस्ट अध्यक्ष संदीप रावत ने सभी अतिथियों और उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त किया।

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