गंगा: श्रद्धा का अमृत और विज्ञान की अनूठी प्रयोगशाला; डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल ने साझा किए विचार

उत्तरकाशी: भारतीय संस्कृति में गंगा केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि जीवन और चेतना का जीवंत प्रवाह है। जहाँ एक ओर अध्यात्म इसे ‘मोक्षदायिनी’ मानकर श्रद्धा अर्पित करता है, वहीं आधुनिक विज्ञान इसके अद्वितीय गुणों को देखकर आज भी चकित है। उत्तरकाशी के पीएम श्री केआरएन जीआईसी धौंतरी के विज्ञान शिक्षक और प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल ने गंगा के इसी वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला है।
वैज्ञानिक रहस्य: क्यों कभी खराब नहीं होता गंगाजल?
डॉ. नौटियाल के अनुसार, एक विज्ञान शिक्षक के रूप में गंगा का अध्ययन करने पर इसकी ‘स्व-शुद्धिकरण’ (Self-purifying) क्षमता सबसे अधिक प्रभावित करती है। शोध बताते हैं कि गंगाजल की विशिष्टता के पीछे मुख्य कारण हैं:
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बैक्टिरियोफेज (Bacteriophages): गंगा के जल में ‘बैक्टिरियोफेज’ नामक लाभकारी वायरस पाए जाते हैं, जो हैजा और पेचिश जैसे रोगों के हानिकारक बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते।
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उच्च ऑक्सीजन स्तर: गंगाजल में ऑक्सीजन को सोखने और धारण करने की शक्ति अन्य नदियों की तुलना में बहुत अधिक है।
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औषधीय गुण: हिमालय की दुर्लभ जड़ी-बूटियों और विशिष्ट खनिजों के बीच से होकर बहने के कारण यह जल औषधीय तत्वों से परिपूर्ण हो जाता है। यही कारण है कि दशकों तक रखे रहने के बाद भी इसकी ताजगी बनी रहती है।
सांस्कृतिक धुरी और पर्यावरण संवेदनशीलता
“गंगे च यमुने चैव…” के मंत्रों से लेकर सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा तक, गंगा हमारे हर संस्कार में रची-बसी है। डॉ. नौटियाल कहते हैं कि “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” का भाव हमें सिखाता है कि हम प्रकृति के स्वामी नहीं, बल्कि संरक्षक हैं। गंगा को ‘माँ’ कहना वास्तव में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का हमारा पारंपरिक तरीका है।
दोहरी जिम्मेदारी: संरक्षण की पुकार
जलवायु परिवर्तन के इस दौर में डॉ. नौटियाल ने एक महत्वपूर्ण आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आज गंगा को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि एक ‘जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र’ (Living Ecosystem) के रूप में देखना होगा। हिमालयी ग्लेशियरों और जलधाराओं को बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
निष्कर्ष: गंगा का संरक्षण वास्तव में हमारी अपनी संस्कृति और भविष्य का संरक्षण है। जब विज्ञान की जिज्ञासा और अध्यात्म की संवेदना एक साथ मिलती है, तभी हम अपनी भावी पीढ़ी को एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण सौंप पाएंगे।







