उत्तर प्रदेशचित्रकूट

कोल समुदाय को जनजाति दर्जा देने की मांग को लेकर हजारों आदिवासियों का पैदल मार्च

राष्ट्रपति के नाम तहसील में सौंपा ज्ञापन, वनाधिकार कानून लागू करने की उठी आवाज

जन एक्सप्रेस/चित्रकूट/मानिकपुर। मारकुंडी तिराहा से तहसील मानिकपुर तक पाठा क्षेत्र के हजारों आदिवासियों ने पैदल मार्च निकालकर कोल समुदाय को जनजाति का दर्जा देने की मांग उठाई। शांतिपूर्ण रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “कोलो को जनजाति का दर्जा दो”, “वनाधिकार नियम लागू करो” तथा “वन विभाग का उत्पीड़न बंद करो” जैसे नारों के साथ बाजार क्षेत्र से होकर तहसील पहुंचकर द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपा।प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल रहे। अधिवक्ता शिवपूजन कोल ने कहा कि आदिवासी समुदाय सदियों से जंगलों की रक्षा करता आया है, लेकिन आज वन संपदा का व्यापारीकरण हो रहा है और आदिवासियों को जंगलों से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन वन उपजों से आदिवासी परिवारों का जीवन चलता था, उनसे भी उन्हें वंचित किया जा रहा है। साथ ही भारत सरकार के वन अधिकार कानून 2006 को मानिकपुर क्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा रहा, जो आदिवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन है।
आदिवासी नेता आशीष कोल ने बताया कि पिछले चार दशकों से उत्तर प्रदेश का कोल समुदाय जनजाति दर्जे के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कोल समुदाय को जनजाति का दर्जा मिल चुका है, इसलिए उत्तर प्रदेश में भी यह सुविधा देकर समुदाय को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।जिला पंचायत सदस्य अनिल कोल ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि कोई आदिवासी परिवार भोजन बनाने के लिए सूखी लकड़ी भी जंगल से लाता है तो उस पर कार्रवाई की जाती है या कथित रूप से धन लेकर छोड़ा जाता है। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले की जांच कराते हुए विजिलेंस निगरानी की मांग की।प्रदर्शन में छेदीलाल, सुखराज, अवधेश नदलाल कोल, संतोष कोल सहित हजारों आदिवासी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button