राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मुस्तफाबाद में आंगनबाड़ी सशक्तिकरण कार्यक्रम का किया शुभारंभ

जन एक्सप्रेस पीलीभीत। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गुरुवार को जनपद के मुस्तफाबाद में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के करकमलों द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों को सक्षम और संसाधन संपन्न बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल का स्वागत जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह व पुलिस अधीक्षक ने पुष्पगुच्छ भेंट कर किया। इस दौरान अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक के साथ-साथ गन्ना विकास एवं चीनी मिलें राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार, जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, विधायक बरखेड़ा स्वामी प्रवक्तानंद, विधायक पूरनपुर बाबूराम पासवान, विधायक बीसलपुर विवेक वर्मा और जिला पंचायत अध्यक्षा डॉ. दलजीत कौर ने भी राज्यपाल का स्वागत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों के अवलोकन से हुई, जिनमें कृषि, उद्यान, पंचायतीराज, बाल विकास, ग्राम्य विकास और बेसिक शिक्षा विभाग शामिल थे। इसके उपरांत राष्ट्रगान का गायन किया गया और आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों द्वारा स्वागत गीत और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। ‘राम आयेंगे तो आंगना सजाऊंगी’, ‘देश रंगीला रंगीला’ और ‘जलवा तेरा जलवा सुंदर सुंदर’ जैसे गीतों पर बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। राज्यपाल ने बच्चों को गिफ्ट पैक देकर उनका उत्साहवर्धन किया।
उपाधि महाविद्यालय की छात्राओं ने नारी सशक्तिकरण पर भाषण और कविता प्रस्तुत की, जिसे राज्यपाल ने सराहते हुए कहा कि बेटियों को अवसर मिले तो वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को 200 संसाधन किट वितरित कीं। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत 100 बच्चों को प्रशस्ति पत्र, 70 वर्ष से अधिक आयु के 100 वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान कार्ड, 5 क्षय रोगियों को पोषण पोटली, प्रधानमंत्री कुसुम योजना के 2 लाभार्थियों को प्रशस्ति पत्र, 3 किसानों को कृषि यंत्र हेतु प्रशस्ति पत्र, ODOP योजना के अंतर्गत 2 लाभार्थियों को टूलकिट व 5 को प्रशस्ति पत्र, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के 3 लाभार्थियों को डमी चेक और एनआरएलएम योजना के तहत 51 लाभार्थियों को डमी चेक वितरित किए गए।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि बच्चों ने अलग-अलग अंदाज में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर यह साबित किया है कि यदि उन्हें अवसर दिए जाएं तो वे जीवन में बहुत आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि फूल खिलता है तो उसे खिलने का अवसर देना चाहिए, इसी प्रकार बच्चों को खेलने और सीखने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके कार्यों का सम्मान किया जाना चाहिए।
राज्यपाल ने निक्षय मित्र योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षय रोगियों को नौ माह तक पोषण पोटली दी जाए और उन्हें पूर्णतया स्वस्थ करने की जिम्मेदारी निभाई जाए। उन्होंने बाल विवाह पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान के अनुसार 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए शिक्षा अनिवार्य है, अतः बाल विवाह पर रोक लगनी चाहिए और यदि कहीं ऐसा होता दिखे तो पुलिस को तुरंत सूचना दी जाए। दहेज प्रथा पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि यह सामाजिक अपराध है, जिसे जड़ से समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने सास और बहू के रिश्ते को बेटी जैसा बनाने की बात कहते हुए समाज को जागरूक करने पर बल दिया।
उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि मुद्रा योजना और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं। राज्यपाल ने कहा कि 9 से 14 वर्ष की सभी बच्चियों को एचपीवी वैक्सीन लगवाना आवश्यक है ताकि उन्हें भविष्य में कैंसर से सुरक्षा मिल सके। इसी क्रम में कार्यक्रम में 5 बच्चियों को वैक्सीन लगवाई गई और लोगों को जागरूक किया गया कि वे अपने घर और मोहल्ले की बच्चियों को भी टीका लगवाने के लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। अपने वक्तव्य में राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार ने राज्यपाल, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश हर दिन विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और महिलाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण जैसी योजनाओं से राज्य आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आशा व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा की, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
जिला पंचायत अध्यक्षा डॉ. दलजीत कौर ने भी राज्यपाल के मार्गदर्शन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विचार हमें प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम का समापन स्मृति चिह्नों के आदान-प्रदान के साथ हुआ, जिसमें विधायक बरखेड़ा ने राज्यपाल को रामलला की प्रतिमा, जिलाध्यक्ष ने श्रीगणेश की प्रतिमा और जिलाधिकारी ने स्मृति चिन्ह भेंट किया।






