लोक महत्व का मुद्दा: मानिकपुर विधायक ने विस में उठाया दर्जनों समस्याओं का मुद्दा

जन एक्सप्रेस। हेमनरायण/सचिन वन्दन
चित्रकूट। सदन मे मानसून सत्र के दौरान मानिकपुर विधायक अविनाश चन्द द्विवेदी ने लोक महत्व का मुद्दा उठाया है। अपने विधानसभा क्षेत्र की आधा दर्जन से अधिक जन मुद्दे उठाया हैं।
बुधवार को मानिकपुर विधायक अविनाश चन्द्र द्विवेदी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक समस्याओं के मुद्दों को उठाया है। जिससे आमजन को समस्या का समाधान होने पर लाभ मिल सकें। विधायक ने पुल निर्माण ,गरीबों के लिए आवास, तुलसीदास जी जन्मस्थली का सौंदर्यीकरण, घाट का कटान रोकने दिवाल का निर्माण, किसान हित मे पंप कैनाल का आधुनिकीकरण, नहरों का विस्तार, सड़क मार्ग चौड़ीकरण, पठन-पाठन के लिए विद्यालय, वन क्षेत्र मे अनापत्ति व किसान हित आदि लोक महत्व के मुद्दे शामिल हैं।
जिसमें मानिकपुर क्षेत्र के चमरौंहा (ऊंचाडीह) स्थित बरदहा नदी मे बहुप्रतीक्षित पुल बनाए जाने का भी मुद्दा उठाया है, जो लोकहित मे बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है। चमरौहा स्थित बरदहा नदी मे पुल बनने की जगह रपटा बना हुआ है। जहां नदी मे बाढ आ जाने से तीस सजार से अधिक आबादी वाले क्षेत्र का संपर्क पूरी तरह से कट जाता है। पुल न होने की वजह से जाने कितने लोगों ने इलाज के अभाव मे अपनी जानें गवां दी हैं। यहां पुल बनना बेहद आवश्यक है।
“क्योंकि यह तीस हजार आबादी वाले क्षेत्र के लोगों के जीवन का सवाल है”।

विधायक ने सदन मे यह मुद्दे उठाए
- मानिकपुर विकासखंड के चमरौहा में बरदहा नदी मे पुल का निर्माण
- राजापुर हनुमान मंदिर मे यमुना नदी की कटान रोकने के लिऐ दिवाल का निर्माण
- गोस्वामी तुलसीदास महाराज की जन्मस्थली राजापुर का सौंदर्यीकरण
- पाठा क्षेत्र के गरीबों के लिये मुख्यमंत्री आवासों की संख्या बढाए जाने
- सिरावल पंप कैनाल की मशीनों का आधुनिकीकरण व क्षेत्र की नहरों का विस्तारीकरण
- मऊ मे कौशिकी नाले पर लघु सेतु का निर्माण
- बोड़ीपोखरी से सरैंया तक मार्ग का चौड़ीकरण
- मारकुंडी मे राजकीय इंटर कालेज
- मऊ-परदवा मार्ग पर 7 किमी. मे लघु सेतु का निर्माण
- वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मार्गो के निर्माण के लिऐ अनापत्ति प्रमाण पत्र
मारकुंडी मे विद्युत उपकेंद्र समेत कई प्रमुख मुद्दा भूल गए विधायक
मारकुंडी मे विद्युत उपकेंद्र के मुद्दे के साथ विधायक जी क्षेत्र की और भी कई प्रमुख समस्याएं भूल गए।
चरैया पुल दशकों से टूटा पड़ा है। बावजूद आज तक किसी ने सुध नहीं ली। जबकि यह पुल आधा दर्जन से अधिक गांवों को जोड़ता है।
यहां के लोगों के लिए बारिश का मौसम बन जाता है आफत
सबसे खास बात तो यह है कि इसी रास्ते से नदी पारकर बच्चे स्कूल जाते है। जब नदी बाढ मे रहती है तब बच्चे स्कूल भी नहीं जा पाते हैं। तात्कालीन जिलाधिकारी ने बच्चों के आवागमन के लिए अस्थाई लोहे का पुल बनवाया था। मारकुंडी मे पूर्व मे प्रस्तावित विद्युत उपकेंद्र की प्रक्रिया ठंडे बस्ते मे कैद है। बिजली समस्या की चिंता किसी भी जनप्रतिनिधि को नहीं है। ऊंचाडीह मे पशु अस्पताल न होने से पशुपालकों को भारी समस्याएं होती है। बहिलपुरवा और बरगढ मे अस्पताल न होने से लोगों की भारी समस्याएं होती है। लोगों को इलाज न मिलने से मजबूरीवश बड़े शहर का रुख करना पड़ता है।






