बार और जूडिशरी के बेहतर तालमेल के बिना वख्त पर इंसाफ मिलना नामुमकिन
सैय्यद कमर हसन रिजवी, स्कालर जज, इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ बेंच

जन एक्स्प्रेस/हमीरपुर: हमीरपुर बार और जूडिशरी के बेहतर तालमेल के बिना पीड़ित को वख्त पर इंसाफ मिलना नामुमकिन। क्योंकि
वकील और जज रथ के दो पहियों की तरह हैं, जिनके बिना इंसाफ का ये रथ किसी भी कीमत पर आगे नहीं बढ़ सकता है। एक वकील अदालत में अपनी दमदार दलीलों के जरिये हमेशा अपने मुअक्किल को बचाने की जद्दोजहद में लगा रहता है। ये एक वकील का अपने क्लाइंट के लिये सबसे बड़ा बलिदान और त्याग होता है। जबकि एक जज कोई भी फैसला देने से पहले मामले के फैक्ट के साथ ही पक्ष विपक्ष
दोनों को सुन्ने के बाद कानून के दायरे में रहकर अपना अहम फैसला देता है, और फैसला देने से पहले वो इस पशोपेश में रहता है कि कहीं उसकी कलम से अनजाने में किसी मासूम बेगुनाह को सजा न मिल जाय। बार और जुडिशरी के आपसी तालमेल के बिना पीड़ित को वख्त पर इंसाफ मिलना मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन है। इस कार्यक्रम ने बार और जूडिशरी के तालमेल की एक बेहतरीन और यादगार मिसाल पेश की है। जो हमें आज के वख्त में अमूमन देखने को नहीं मिलती है। हमें उम्मीद है कि आपकी ये कोशिश पीड़ित को वख्त पर इंसाफ दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी।
ये बातें इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के स्कालर जज सैय्यद कमर हसन रिजवी ने जिला अदालत के मीटिंग हाल में कालत के पेशे में 50 साल पूरे करने वाले सीनियर वकीलों के सम्मान में शासकीय अधिवक्ताओं की तरफ से आयोजित किये गये प्रोग्राम के दौरान कहीं। इसके पूर्व चीफ गेस्ट को गार्ड आफ आनर दिया गया। प्रोग्राम की शुरुआत डीजीसी राजेश शुक्ला के चीफ गेस्ट को बुके और मोमेंटों भेंट करने के साथ हुई।

इस मौके पर बोलते हुये जिला अदालत के स्कालर जज मनोज कुमार राय ने कहा कि हम सबको जिंदगी में अपने बड़े और सीनियर से बहुत कुछ सीखने और समझने को मिलता है। क्योंकि उनके पास तजुर्बा और अनुभव होता है, जो न तो बाजार में मिलता है, और न ही कहीं से खरीदा जा सकता है। इसलिये अपने सीनियर के सम्मान की ये एक बेहतरीन पहल है, जो शासकीय अधिवक्ताओं और जिला अधिवक्ता संघ की कोशिश से कामयाबी के इस मकाम तक पहुंची है। उम्मीद है कि एसी कोशिशें आगे भी होती रहेंगी। इस मौके पर चीफ गेस्ट ने वकालत के 50 साल पूरे करने वाले सभी सीनियर वकीलों को मूमेंटों और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर विद्वान जज ज्ञान प्रकाश सिंह, अरुण कुमार मल्ल,उदयवीर सिंह, प्रमोद कुमार, रनवीर सिंह, अनिल कुमार खरवार, विनय कुमार सिंह, निहारिका जायसवाल, अभिषेक त्रिपाठी, महेन्द्र कुमार पाण्डेय, वन्दना अग्रवाल, अंकित पाल सहित शैली शरण खासतौर से मौजूद रहीं। जबकि एडीजीसी विशम्भर सिंह पाल, एडीजीसी सुभाष श्रीवास्तव, एडीजीसी अवध नरेश चन्देल, डीजीसी प्रवीण सिंह भदौरिया, एडीजीसी रूद्र प्रताप सिंह, एडीजीसी विजय सिंह, एडीजीसी चन्द्र प्रकाश गोस्वामी, एडीजीसी मणिकर्ण शुक्ला, एडीजीसी सुशील त्रिपाठी, एडीजीसी रामबाबु अवस्थी, एडीजीसी द्ववेदी सहित बुद्धिजीवी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। जबकि कार्यक्रम का शानदार संचालन डीजीसी विजय प्रताप सिंह ने किया।







