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मॉक ड्रिल के दौरान करतब दिखाते हुए गिरे जौनपुर के जिलाधिकारी, वीडियो बना चर्चा का विषय

जन एक्सप्रेस/जौनपुर:जौनपुर पुलिस लाइन में शुक्रवार को आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब जिलाधिकारी दिनेश चंद्र सिंह अभ्यास के दौरान संतुलन खो बैठे और औंधे मुंह गिर पड़े। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई।

दरअसल, पुलिस लाइन में आपदा प्रबंधन और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के उद्देश्य से मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया था। इस अभ्यास में विद्युत आपूर्ति बंद कर वास्तविक आपात स्थिति का माहौल बनाया गया, ताकि प्रशासनिक अमला यह समझ सके कि आपदा के समय राहत और बचाव कार्य किस प्रकार किए जाने चाहिए।

सिविल डिफेंस के सहयोग से हुआ अभ्यास

मॉक ड्रिल सिविल डिफेंस कोर जौनपुर के सहयोग से संपन्न कराई गई थी। इस दौरान आगजनी, बिजली फेल होने, घायलों को सुरक्षित निकालने और प्राथमिक उपचार जैसी परिस्थितियों का अभ्यास किया गया।

कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी दिनेश चंद्र सिंह स्वयं मौके पर मौजूद रहे और पूरे अभ्यास की बारीकी से निगरानी कर रहे थे।

जोर आजमाइश करते दिखे जिलाधिकारी

मॉक ड्रिल के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जिलाधिकारी दिनेश चंद्र सिंह ने उत्साह में एक भूतपूर्व सैनिक को अपने कंधे पर उठा लिया और कुछ दूरी तक दौड़ भी लगाई।

इस दौरान मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और सिविल डिफेंस के सदस्य यह दृश्य देखकर हैरान भी हुए और मुस्कुराते भी नजर आए। जिलाधिकारी का यह अंदाज मौके पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

मजाकिया लहजे में कही बात, फिर हुआ हादसा

इसी बीच जिलाधिकारी ने मजाकिया अंदाज में पास खड़े लोगों से कहा —
“पिस्टल दियो ज़रा…”

इसके बाद जैसे ही वे आगे बढ़े, अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वे औंधे मुंह जमीन पर गिर पड़े। कुछ पल के लिए मौके पर सन्नाटा छा गया और अधिकारी तुरंत उनकी ओर दौड़े।

कोई गंभीर चोट नहीं, सभी ने ली राहत की सांस

हालांकि जिलाधिकारी तुरंत स्वयं उठ खड़े हुए। प्राथमिक तौर पर उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई। इसके बाद उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ उस भूतपूर्व सैनिक को गले लगाया, जिससे माहौल फिर सामान्य हो गया।

घटना के बाद मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।

सोशल मीडिया पर वीडियो चर्चा में

मॉक ड्रिल के दौरान गिरने का यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं — कोई इसे प्रशासनिक अधिकारी का जज़्बा बता रहा है तो कोई इसे जरूरत से ज्यादा उत्साह का नतीजा।

प्रशासनिक सक्रियता का संदेश

हालांकि इस पूरी घटना को प्रशासनिक स्तर पर एक सकारात्मक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। जिलाधिकारी स्वयं मैदान में उतरकर मॉक ड्रिल में शामिल हुए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि आपदा प्रबंधन को लेकर प्रशासन कितना गंभीर है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनता और प्रशासनिक तंत्र को यह समझाना था कि किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय संयम और प्रशिक्षण के आधार पर काम करना जरूरी है।

मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक सम्पन्न

घटना के बावजूद मॉक ड्रिल कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अधिकारियों ने अभ्यास के दौरान मिली कमियों को नोट किया और भविष्य में सुधार के निर्देश भी दिए गए।

इस दौरान पुलिस प्रशासन, सिविल डिफेंस, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

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