लखनऊ में तंत्र की बेरुखी: ऑक्सीजन न मिलने से पत्रकार की मौत!
108 एम्बुलेंस पहुंची लेकिन ऑक्सीजन नहीं" — सिस्टम की लापरवाही ने ली ज़िंदग़ी

लखनऊ जन एक्सप्रेस:राजधानी लखनऊ में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की एक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। ऑक्सीजन की किल्लत के कारण एक पत्रकार की एम्बुलेंस में ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि आमजन की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल उठाती है।बताया जा रहा है कि पीड़ित पत्रकार को जब 108 एम्बुलेंस सेवा से मदद मिली, तब वह ऑक्सीजन के लिए गुहार लगाता रहा। लेकिन एम्बुलेंस में मौजूद टीम ऑक्सीजन की सुविधा देने में विफल रही। नतीजतन, पत्रकार की मौत हो गई।
सवालों में घिरा सिस्टम — किसकी जवाबदेही?
108 एम्बुलेंस में ऑक्सीजन की सुविधा क्यों नहीं थी? एम्बुलेंस स्टाफ ने मदद क्यों नहीं की? क्या राजधानी में भी सिस्टम इतना लाचार है? जो दूसरों की आवाज़ बना, उसकी चीखें भी अनसुनी रहीं दुखद irony यह है कि जो पत्रकार वर्षों तक समाज के लिए आवाज़ उठाता रहा, वह खुद वक्त पर मदद के लिए तड़पता रहा और किसी ने उसकी नहीं सुनी। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है — जब एक पत्रकार सुरक्षित नहीं, तो आम जनता की क्या स्थिति होगी?
वीडियो वायरल, प्रशासन मौन
इस दर्दनाक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पत्रकार के आखिरी क्षणों की झलक देखी जा सकती है। हालांकि जन एक्सप्रेस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इससे उठे सवाल सरकार और स्वास्थ्य विभाग के गले की हड्डी बन चुके हैं।
जनता पूछ रही है — क्या यही है “आपात सेवा”?
लखनऊ जैसे शहर में अगर 108 एम्बुलेंस में ऑक्सीजन नहीं है, तो छोटे कस्बों और गांवों की हालत का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं। क्या अब भी सरकार जागेगी?






