उत्तर प्रदेशचित्रकूटमां आनंदी

मां आनंदी का चमत्कारी मंदिर: जहां देवी के सिर नीचे और पैर ऊपर!

मानिकपुर क्षेत्र में आस्था का प्राचीन केंद्र, जीर्ण-शीर्ण सीढ़ियों से जूझ रहा ऐतिहासिक धरोहर

जन एक्सप्रेस मानिकपुर/चित्रकूट:(हेमनारायण हेमू) – उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद के मानिकपुर ब्लॉक में स्थित मां आनंदी देवी का मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी लोक-आस्था और चमत्कारों का जीवंत प्रतीक भी है। मान्यता है कि यह मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है और आज भी क्षेत्र के कई गांवों में मां आनंदी को कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। शादी-विवाह हो या बच्चे का जन्म — हर शुभ कार्य में मां आनंदी का आशीर्वाद लेना अनिवार्य माना जाता है। यहां स्थित लगभग 300 सीढ़ियां, जिनसे होकर भक्त मां के दर्शन करने जाते हैं, आज जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं और इस ऐतिहासिक धरोहर की सुध लेने वाला कोई नहीं।

चमत्कारी कथा: जब मां आनंदी ने झुका दिया अपना रूप भक्त के लिए
इस मंदिर से जुड़ी एक लोककथा इलाके में बेहद प्रसिद्ध है। बताया जाता है कि एक गर्भवती महिला जब मां के दर्शन के लिए सीढ़ियां चढ़ रही थी, तो अत्यधिक ऊंचाई और थकावट के कारण उसने मां से प्रार्थना की कि वह ऊपर तक नहीं पहुंच पा रही है। इस पर मां आनंदी ने कहा कि “तू आंख बंद कर, मैं नीचे आ रही हूं।” लेकिन जैसे ही मां नीचे आ रही थीं, “ककरहाट” की आवाज सुनकर महिला की आंख खुल गई, और उसी क्षण मां की मूर्ति आधे में रुक गई। आज भी मां आनंदी की प्रतिमा में उनके सिर नीचे और पैर ऊपर दिखाई देते हैं — जो इस चमत्कार का प्रमाण माने जाते हैं।

पुरातत्व विभाग और प्रशासन की उपेक्षा से उपेक्षित आस्था का प्रतीक
इतिहास, आस्था और संस्कृति का संगम बना यह मंदिर अगर पुरातत्व विभाग या प्रशासन द्वारा विकसित किया जाए, तो यह न केवल मानिकपुर क्षेत्र बल्कि पूरे बुंदेलखंड का एक प्रमुख तीर्थ स्थल बन सकता है। लेकिन अफसोस, 300 सीढ़ियों की बदहाल हालत, जगह-जगह टूटी संरचनाएं और मूलभूत सुविधाओं का अभाव इसे उपेक्षित बनाए हुए हैं। स्थानीय बुजुर्गों और श्रद्धालुओं की वर्षों से मांग है कि इस सिद्ध स्थल का सरकारी संरक्षण हो, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस चमत्कारी विरासत से जुड़ सकें। पूरे मानिकपुर क्षेत्र में मां आनंदी की पूजा करने वाले हजारों श्रद्धालु हर साल यहां आते हैं — लेकिन उन्हें बेहतर सुविधा और सुरक्षा देना अब समय की मांग है।

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