उत्तर प्रदेशराजनीतिलखनऊ

मौलाना मदनी ने भागवत के बयान का किया समर्थन, कहा– काशी और मथुरा पर बातचीत को तैयार मुस्लिम समाज

संघ प्रमुख की पहल की सराहना, बोले– संवाद से ही सुलझेंगे विवाद; अवैध घुसपैठियों के निष्कासन का समर्थन, लेकिन सभी मुसलमानों को बांग्लादेशी बताना गलत

जन एक्सप्रेस, लखनऊ। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने शुक्रवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों का स्वागत करते हुए मुस्लिम समुदाय और संघ के बीच संवाद की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि काशी और मथुरा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत से समाधान निकल सकता है और उनका संगठन इस संवाद के लिए पूरी तरह से तैयार है।

हम हर तरह की बातचीत का समर्थन करेंगे” – मदनी

एक विशेष साक्षात्कार में मौलाना मदनी ने कहा, बहुत सारे किंतु-परंतु हैं, लेकिन हमें मतभेदों को कम करना होगा। मेरा संगठन पहले ही यह प्रस्ताव पारित कर चुका है कि बातचीत होनी चाहिए। हम हर तरह की बातचीत का समर्थन करेंगे।उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में राजनीतिक और धार्मिक संवाद में गिरावट आई है, जिसे सुधारने की ज़रूरत है।

भागवत के मथुरा-काशी पर बयान को दी सकारात्मक प्रतिक्रिया

मदनी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा मथुरा और काशी से जुड़े बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि यह सराहनीय है कि संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि केवल राम मंदिर आंदोलन को ही संघ ने औपचारिक समर्थन दिया था।मथुरा-काशी जैसे मसलों पर आपसी संवाद और समझ बेहद जरूरी है। यदि पहल की गई है, तो उसे मान्यता मिलनी चाहिए,” मदनी ने कहा।

भारत में मुस्लिम नरसंहार की विदेशी आशंका गलत”

भारत में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ संभावित नरसंहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठ रहे बयानों को खारिज करते हुए मदनी ने कहा: विदेश में मुझसे भी यह कहा गया कि भारत में मुस्लिम नरसंहार होगा। लेकिन मैं इस नैरेटिव पर विश्वास नहीं करता। उन्होंने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देश के हालात की सराहना की और कहा कि यदि यही हमला किसी और देश में हुआ होता, तो अराजकता फैल सकती थी।

अवैध घुसपैठियों के निष्कासन का समर्थन, लेकिन…

मौलाना मदनी ने अवैध घुसपैठ और धर्मांतरण को जनसंख्या असंतुलन की वजह बताया और कहा कि किसी भी विदेशी या बांग्लादेशी नागरिक को भारत में नहीं रहना चाहिए। हालांकि, इस विषय पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा:वह हर मुसलमान को बांग्लादेशी बता रहे हैं, यहां तक कि मुझे भी बांग्लादेश भेजने की बात कर रहे हैं। यह उनकी मानसिकता को दर्शाता है।”मौलाना मदनी के अनुसार, देश में आपसी विश्वास और समझ को बढ़ावा देने के लिए धर्मों और संगठनों के बीच सीधा संवाद आवश्यक है। उन्होंने भागवत की पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि बातचीत से देश में सौहार्द का माहौल बनेगा।

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