सिद्धा पर्वत पर खनन माफिया का कहर
राम तपोभूमि पर रातों-रात हो रहा बॉक्साइट का अवैध उत्खनन, प्रशासन बना मूकदर्शक

जन एक्सप्रेस/चित्रकूट। (सचिन वंदन):धर्मनगरी चित्रकूट के चौरासीकोशीय परिक्रमा पथ पर स्थित ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पुरातात्विक महत्व के केंद्र सिद्धा पर्वत पर इन दिनों खनन माफियाओं का आतंक चरम पर है। भगवान श्रीराम की तपोभूमि, सरभंग मुनि आश्रम और श्रीराम प्रतिज्ञा स्थल से सटे इस पवित्र पर्वत को माफिया खुलेआम छलनी कर रहे हैं, जबकि प्रशासन रहस्यमयी चुप्पी साधे बैठा है।
रात के अंधेरे में पहाड़ों की लूट
स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, प्रतिबंधित और संवेदनशील क्षेत्र में देर रात भारी मशीनों की गड़गड़ाहट सुनाई देती है। जेसीबी और अन्य भारी उपकरणों से बॉक्साइट का अवैध उत्खनन किया जा रहा है और ट्रकों के ज़रिए खनिज को ठिकानों तक पहुँचाया जा रहा है। यह सिलसिला कई दिनों से जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायतें हुईं, कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और खनिज विभाग को अवैध खनन की जानकारी दी, बावजूद इसके न कोई छापेमारी हुई और न ही खनन रुका। इससे साफ़ संकेत मिल रहे हैं कि या तो प्रशासन पूरी तरह असहाय है या फिर इस अवैध कारोबार में कहीं न कहीं उसकी मौन सहमति शामिल है।
पर्यावरण और आस्था दोनों पर हमला
सिद्धा पर्वत न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील है। अवैध खनन से पहाड़ों का अस्तित्व खतरे में है, वन संपदा नष्ट हो रही है और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह धरोहर मिटने की कगार पर पहुँच गई है।
“यह राम राज्य है या माफिया राज?” — राघवेंद्र त्रिपाठी
कांग्रेस नेता राघवेंद्र त्रिपाठी ने इस मुद्दे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा—“भगवान श्रीराम की तपोभूमि, सरभंग मुनि आश्रम के निकट स्थित अस्थि समूह पर्वत और सिद्धा पर्वत श्रृंखलाओं को शासन-प्रशासन और स्थानीय विधायक की शह पर नेस्तनाबूत किया जा रहा है। सत्ता के दबाव में प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। यह अवैध उत्खनन नहीं रुका तो इतिहास माफ नहीं करेगा। क्या यही बीजेपी का राम राज्य है?”
प्रशासन की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना राजनीतिक संरक्षण के इतना बड़ा अवैध खनन संभव है? प्रशासन की खामोशी ने अवैध खनन में साठगांठ की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। यदि जल्द ही अवैध खनन पर रोक नहीं लगी, तो ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने आंदोलन और न्यायिक हस्तक्षेप की चेतावनी दी है।अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या प्रशासन नींद से जागेगा या सिद्धा पर्वत यूँ ही खनन माफियाओं की भेंट चढ़ता रहेगा।






