मुम्बई

पद-प्रतिष्ठा पर भारी पड़ा मां का आदेश, बविआ नेता पाटील ने किया चुनाव लड़ने से इनकार

मुंबई । बीते कुछ दिनों से वसई-विरार की राजनीति में चल रही उठा-पटक शांत हो गई है। बहुजन विकास आघाडी (बविआ) के वरिष्ठ नेता और पार्टी प्रमुख विधायक हितेंद्र ठाकुर के खास राजीव पाटील के भाजपा में जाने की खबरों पर विराम लग गया है। बताया जा रहा है कि राजीव पाटील के बविआ छोड़ने और किसी अन्य पार्टी से चुनाव लड़ने के निर्णय से उनकी 89 वर्षीय मां काफी नाराज थी। वह नहीं चाहती थीं कि राजीव पाटील अपनों के सामने ही चुनाव लड़ें। मां की बातों से भावुक होकर राजीव पाटील ने बविआ में रहने के साथ ही विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। राजीव पाटील के इस फैसले से असमंजस में पड़े बविआ के कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।

जानकारी के अनुसार राजीव पाटील बहुजन विकास आघाड़ी के कार्याध्यक्ष और कद्दावर नेता हैं। पार्टी की हर चुनावी जीत में उनकी अहम भूमिका रहती है। कुछ दिनों पहले मीडिया में खबरें आईं कि वीवीएमसी के प्रथम महापौर व बविआ के दिग्गज नेता राजीव पाटील पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होंगे और नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। इस खबर से वसई-विरार में राजनीतिक हलचल मच गई। वहीं नवरात्रि उत्सव के दौरान राजीव पाटील भाजपा के कई कार्यक्रमों में शामिल होते दिखे। दूसरी ओर बविआ प्रमुख हितेन्द्र ठाकुर ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक बुलाई थी। ठाकुर ने दावा किया था कि वह जिले की सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और जीत दर्ज करेंगे।

इधर, वसई-विरार में चल रही उठा-पटक के बीच राजीव पाटील ने फैसला लिया कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे और न ही बीजेपी में शामिल होंगे। पार्टी के पारिवारिक सूत्रों की मानें तो राजीव पाटील के किसी अन्य पार्टी में जाने के फैसले से उनकी मां काफी नाराज थीं। वे नहीं चाहती थीं कि वह बविआ छोड़कर किसी भी पार्टी में शामिल हों। उनकी मां का कहना था कि बविआ अपना ही परिवार है, अपनों के ही सामने चुनाव क्यों लड़ रहे हो। मां की बातों से भावुक होकर राजीव पाटील ने फैसला किया है कि वे न तो किसी पार्टी में जाएंगे और न ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। इस मामले में राजीव पाटील ने कहा कि मैंने पार्टी नहीं छोड़ी थी। मुझे बीजेपी और शिवसेना (उद्धव) से ऑफर आया था कि आप नालासोपारा विधानसभा से चुनाव लड़ें। फिलहाल, मां के कहने पर मैंने अपना फैसला बदल लिया है। अब मैं न तो किसी पार्टी में जा रहा हूं और न ही कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा।

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