
जन एक्सप्रेस/नई टिहरी।जिला मुख्यालय क्षेत्र के सी. ब्लॉक टाइप-3 में पुनर्वास विभाग की कथित लापरवाही के चलते दो सरकारी इमारतों, एक निजी भवन और सामुदायिक पार्क में दरारें पड़ने का मामला सामने आया है। पुनर्वास विभाग द्वारा आवंटित प्लॉटों के समतलीकरण के दौरान आसपास की परिसंपत्तियां खतरे की जद में आ गई हैं, लेकिन जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां अब तक ठोस कार्रवाई करती नजर नहीं आ रही हैं।
डंपिंग जोन को बना दिया प्लॉट
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुनर्वास विभाग ने डंपिंग जोन को अविकसित प्लॉट के रूप में आवंटित कर दिया। प्लॉट स्वामी द्वारा समतलीकरण कार्य शुरू किए जाने के बाद ऊपरी हिस्से में स्थित भवन का आंगन अचानक भरभराकर गिर गया। इसके बाद क्षेत्र में दरारें और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गईं।भवन स्वामी बलवीर नेगी और सतीश उनियाल ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की थी। शिकायत के बाद कुछ समय के लिए इंजीनियरों की निगरानी में सुरक्षा कार्य शुरू होने की बात कही गई, लेकिन प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। रविवार को दोबारा भूस्खलन होने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
100 से अधिक संदिग्ध आवंटनों की जांच
सूत्रों के अनुसार, टिहरी में पुनर्वास विभाग द्वारा ग्रीन बेल्ट, संवेदनशील स्थलों, पार्क और पार्किंग क्षेत्रों में भी कथित रूप से अनियमित तरीके से प्लॉट आवंटन किए गए हैं। ऐसे करीब 100 से अधिक आवंटन संदेह के घेरे में बताए जा रहे हैं। इन मामलों को लेकर जिलाधिकारी और पुनर्वास निदेशक नितिका खंडेलवाल द्वारा जांच के निर्देश दिए गए हैं।
विस्थापन और सुरक्षात्मक कार्य की मांग
प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षात्मक कार्य कराने और दोनों परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही और भू-माफियाओं के साथ सांठगांठ के कारण सार्वजनिक संपत्तियां भी जोखिम में डाल दी गई हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है।






