नंबर प्लेट निजी, काम व्यावसायिक! दोपहिया चालकों की मनमानी कब थमेगी?
ओला-ऊबर, जोमैटो-स्विगी और रैपिडो से लेकर हर गली-मोहल्ले में घूम रहे 'प्राइवेट नंबर प्लेट वाले प्रोफेशनल्स'

जन एक्सप्रेस/;लखनऊ: एक तरफ सरकार सड़क सुरक्षा के बड़े-बड़े वादे कर रही है, दूसरी ओर देश की सड़कों पर नियमों की धज्जियां उड़ाते मोटरसाइकिल चालक खुलेआम निजी नंबर प्लेट लगाकर व्यावसायिक गतिविधियों में लिप्त हैं। ओला-ऊबर की बाइक राइड हो या जोमैटो-स्विगी की फूड डिलीवरी, या फिर रैपिडो और इनडाइब जैसी सेवाएं—हर जगह प्राइवेट रजिस्टर्ड बाइक से धड़ल्ले से धंधा किया जा रहा है।
लेकिन सवाल ये है: अगर इन बाइकों से कोई गंभीर दुर्घटना हो जाए, तो ज़िम्मेदारी किसकी होगी? क्या कंपनियां हाथ खड़े कर देंगी या फिर इन चालकों के पास कोई वैध बीमा भी होगा?
बीमा किसका? ज़िम्मेदारी किसकी?
बड़ी कंपनियों के नाम पर चलने वाली बाइक सेवाएं दिखने में प्रोफेशनल लगती हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। ज़्यादातर बाइक राइडर्स निजी वाहन के कागज़ात लेकर व्यवसायिक उपयोग में अपने वाहन लगा देते हैं, जो कि नियमों के खिलाफ है। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार व्यावसायिक उपयोग के लिए वाहन का रजिस्ट्रेशन भी कमर्शियल होना चाहिए और बीमा भी उसी आधार पर कराया जाना चाहिए।
लेकिन सड़कों पर ये बाइक्स नियमों को ठेंगा दिखाकर दौड़ रही हैं।
सिस्टम सो रहा है, हादसे का इंतज़ार कर रहा है!
अब तक कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जहां डिलीवरी के दौरान एक्सीडेंट हुआ, लेकिन कंपनी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “ड्राइवर स्वतंत्र ठेकेदार है, हमारी जिम्मेदारी नहीं!” और जब बाइक निजी रजिस्ट्रेशन की होती है, तो बीमा कंपनी भी क्लेम देने से इंकार कर देती है।
तो आम जनता और ड्राइवर दोनों लटकते रह जाते हैं—कानून और सिस्टम के बीच।
सरकार कब जागेगी?
सरकार और ट्रांसपोर्ट विभाग इस खुले खेल पर आंख मूंदे बैठा है। सवाल यह भी उठता है कि क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है? क्यों नहीं की जा रही सख्त जांच? क्यों नहीं जब्त किए जा रहे ऐसे वाहन जो नियमों को ताक पर रखकर व्यवसायिक इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं?
नेहा ने सरकार से मांग की
1. कमर्शियल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाए ऐसे सभी दोपहिया वाहनों के लिए जो व्यवसायिक उपयोग में लाए जा रहे हैं।
2. डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू हो जिससे यह रिकॉर्ड रहे कि कौन सा वाहन किस दिन किस कंपनी के लिए काम कर रहा है।
3. कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए जो निजी नंबर प्लेट वाले वाहनों को काम में लगा रही हैं।
4. पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन चलाया जाए कि ऐसे वाहनों की सवारी करना भी कानूनी तौर पर जोखिम भरा हो सकता है।
कभी भी हो सकता है ब्लास्ट, और तब होगा सिस्टम का पोस्टमार्टम!
सरकार और सिस्टम को चाहिए कि अभी जागे, वरना आने वाले समय में जब कोई बड़ा हादसा होगा, तब न तो कंपनियां जिम्मेदारी लेंगी और न ही बीमा कंपनियां। पीड़ित जनता ही फिर सिस्टम की बलि चढ़ेगी।






