दिल्ली/एनसीआर

भारतीय जन संचार संस्थान में ‘राजभाषा सम्मेलन’ का आयोजन

नई दिल्ली । गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग की सचिव अंशुली आर्या ने आज यहां कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शीर्ष नेतृत्व ने हिंदी और भारतीय भाषाओं को बहुत बढ़ावा दिया है। भारतीय भाषाओं का यह ‘अमृतकाल’ है। उन्होंने कहा कि लोगों में भाषा को लेकर हीनता का भाव खत्म हो रहा है। आज भारत सरकार के सभी कार्यक्रमों में हिंदी का बोलबाला है। अंशुली आर्या भारतीय जन संचार संस्थान और राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान द्वारा आयोजित राजभाषा सम्मेलन में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं।

सम्मेलन में भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा के कुलपति प्रो. आर. के. सिन्हा, वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत और सईद अंसारी सहित कई लोगों ने भाग लिया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि हमें इस भ्रम को दूर करने की जरूरत है कि हिंदी राष्ट्रभाषा है। भारत में बोली जाने वाली सभी भाषाएं राष्ट्रभाषाएं हैं। हिंदी राजभाषा है, इसका किसी से कोई विरोध नहीं है। बहुभाषिक होना, भारत का गुण है। हमारे देश में सभी लोग सभी भाषाओं को सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज में शत प्रतिशत हिंदी के उपयोग को लेकर कानून है।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि आत्मविश्वास के साथ हिंदी बोलिए। आत्मविश्वास के साथ हिंदी लिखिए। जो जिस क्षेत्र, जिस राज्य में रहता है, वो वहां की प्रचलित हिंदी बोलता है। हमें अपनी भाषा को लेकर न शर्म महसूस करनी चाहिए और न ही इसके इस्तेमाल से डरना चाहिए।

इस अवसर पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा के कुलपति प्रो. आर. के. सिन्हा ने कहा कि तकनीक के विकास ने हमारे लिए एक-दूसरे से जुड़ना बहुत आसान कर दिया है। आज हम ऑप्टिकल फाइबर के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ गए हैं। अब हम दूसरे देशों को प्रौद्योगिकी और संचार उपकरण निर्यात करते हैं। इस विकास से हिंदी के उपयोग और लोकप्रियता को बढ़ावा मिला है।

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