47 जिलों में तीन साल से नहीं भरे गए जिला समन्वयकों के पद, बीएसए को एक माह की चेतावनी
तीन वर्षों से लंबित पद भरने की प्रक्रिया में लापरवाही

जन एक्सप्रेस/ लखनऊ: उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा परिषद की प्रशासनिक लापरवाही एक बार फिर उजागर हो गई है। राज्य के 47 जिलों में तीन वर्षों से जिला समन्वयकों के पद खाली पड़े हैं और संबंधित बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) द्वारा अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। इसी प्रकार 70 जिलों में ब्लॉक स्तरीय आउटसोर्सिंग पद चार वर्षों से रिक्त हैं।
अब इस लापरवाही पर अंकुश लगाने के लिए महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश जारी किए हैं कि एक माह के भीतर सभी लंबित पद भरे जाएं, अन्यथा संबंधित अधिकारियों को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) दी जाएगी।
2022 में जारी हुए थे निर्देश, 8 बार भेजे गए रिमाइंडर, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
वर्ष 2022 में शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश के 47 जिलों में संविदा के माध्यम से जिला परियोजना कार्यालयों में खाली पड़े पदों के चयन के निर्देश जारी किए गए थे।
इनमें शामिल पद थे:
जिला समन्वयक (प्रशिक्षण)
जिला समन्वयक (बालिका शिक्षा)
जिला समन्वयक (सामुदायिक सहभागिता)
जिला समन्वयक (समेकित शिक्षा)
जिला समन्वयक (निर्माण)
जिला समन्वयक (एमआईएस)
ईएमआईएस प्रभारी
हालांकि इतने गंभीर निर्देशों के बावजूद चयन प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। आठ बार रिमाइंडर भेजे जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने रुचि नहीं दिखाई।
इन जिलों में सबसे ज्यादा लापरवाही
आगरा, अमरोहा, अलीगढ़, आजमगढ़, बलिया, बिजनौर, इटावा, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, बलरामपुर, बांदा, चित्रकूट, देवरिया, अयोध्या, फतेहपुर, कानपुर नगर, कुशीनगर, प्रतापगढ़, रायबरेली, सहारनपुर, शामली, बागपत, बदायूं, गोंडा, हाथरस, कासगंज, मथुरा, मेरठ, सीतापुर, वाराणसी समेत कुल 47 जिले इस सूची में शामिल हैं।
आउटसोर्सिंग के पदों पर भी चुप्पी, 70 जिलों में 4 साल से नहीं हुआ चयन
क्वालिटी कोऑर्डिनेटर, सहायक लेखाकार, कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे महत्वपूर्ण आउटसोर्सिंग पद भी गौतमबुद्धनगर, हापुड़, कन्नौज, लखीमपुर और महोबा को छोड़कर अन्य 70 जिलों में चार वर्षों से खाली हैं। इन पदों के लिए भी अब एक माह की समयसीमा तय की गई है।
महानिदेशक का सख्त निर्देश – अब और देरी नहीं होगी बर्दाश्त
महानिदेशक मोनिका रानी ने साफ तौर पर कहा है कि,जो भी अधिकारी नियुक्ति प्रक्रिया में कोताही बरतेगा, उसकी गोपनीय प्रविष्टि में प्रतिकूल टिप्पणी की जाएगी। यह मामला केवल प्रशासनिक दक्षता का नहीं, बल्कि लाखों बच्चों की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा है।उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में अधिकारियों की लापरवाही से शैक्षिक गुणवत्ता और प्रशासनिक कार्यों पर गहरा असर पड़ रहा है। अब देखना होगा कि सख्त चेतावनी के बाद भी विभागीय मशीनरी समय पर जागती है या नहीं।






