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भरत की महिमा राम जानते तो है लेकिन वह भी बता नही सकते- शांतनु महाराज

जन एक्सप्रेस/महोबा: शहर के डाक बंगला मैदान में चल रही रामकथा अमृत वर्षा से माहौल पूरी तरह से भक्तिमय बना हुआ है l आठवे दिन शुक्रवार को शांतनु महाराज ने भरत चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि जग जप राम राम जप जेहि अर्थात भगवान स्वयं भरत का स्मरण करते है l मानस में भरत को अनेक लोगो ने महिमा मंडित किया है। तीर्थराज प्रयाग ने कहा कि भरत सब विधि साधु हैं। भगवान श्रीराम ने स्वयं कहा कि लखन भरत जैसा पवित्र भाई संसार में नही मिल सकता है। जनक ने सुनैना से कहा कि रानी भरत की महिमा राम जानते तो है लेकिन वह भी बता नही सकते l भरत की साधना को बताते हुए पूज्यश्री ने कहा कि उनकी कठिन साधना को देखकर बड़े बड़े साधु संत भी उनके पास जाने में घबराते थे स्वयं वसिष्ठ भी जाने से कतराते थे l

पिता की मृत्यु, प्रभु राम के वन गमन का समाचार मिलने पर भरत विह्वल हो गए और विलाप करने लगे माता कैकेई को बहुत बुरा भला कहा है सारी सभा को फटकार लगाई है l कौशल्या के समझाने पर भरत शांत हुए है और सबको आश्वासन दिया है कहा कि हम सबको प्रभु राम से मिलाने ले चलेंगे और पूरी प्रजा भरत के साथ भगवान राम से मिलने चित्रकूट चली । भगवान से मिलन हुआ है और भगवान राम के आदेश से उनकी पादुका सिरोधार्य कर भरत अयोध्या वापस आये है और उसी पादुका को सिंहासन पर रखकर अयोध्या के राजकाज को संभाला है l इस कारुणिक प्रसंग को सुनकर सम्पूर्ण जनमानस श्रोतासमाज भावविह्वल हो गया l सबके अश्रुधार फूट पड़े एवं सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।

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