सतुआ बाबा की रोटी के चक्कर में मत पड़ो अन्य साधू संत को देखो
जन एक्सप्रेस।प्रयागराज
उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज़ हो गई है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने प्रयागराज में अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ऐसा बयान दिया है, जिसे सियासी गलियारों में “इशारों में बड़ा संदेश” माना जा रहा है। केशव मौर्या ने दो टूक शब्दों में कहा—
“सतुआ बाबा की रोटी के चक्कर में मत पड़ो, सभी का ख्याल करो।”
हालांकि उन्होंने किसी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन बयान के निहितार्थ साफ़ माने जा रहे हैं।
वायरल वीडियो से जुड़ता है मामला
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे सतुआ बाबा के यहां रोटी सेंकते हुए दिखाई दिए थे। सतुआ बाबा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का क़रीबी माना जाता है। इसी पृष्ठभूमि में केशव मौर्या का बयान सामने आने के बाद चर्चाओं का बाज़ार गर्म है।
अर्धसत्य का सहारा, पूरा संदेश इशारों में
सियासी विश्लेषकों का कहना है कि केशव मौर्या ने महाभारत के प्रसंग की तरह अर्धसत्य का सहारा लिया।
युधिष्ठिर के प्रसिद्ध कथन—
“अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरो”
(अश्वत्थामा मारा गया—मनुष्य या हाथी, यह स्पष्ट नहीं)
की तरह ही केशव का बयान भी इशारों में बहुत कुछ कह गया।
यानी बात कही गई, लेकिन पूरी नहीं। समझने वालों के लिए संदेश स्पष्ट है और न समझने वालों के लिए सिर्फ़ एक सामान्य नसीहत।
अफसरों को साफ़ संकेत
केशव मौर्या के बयान को प्रशासनिक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। संदेश यही माना जा रहा है कि अधिकारी किसी एक व्यक्ति, समूह या प्रभाव के दबाव में काम न करें, बल्कि सभी वर्गों और सभी जनप्रतिनिधियों के साथ समान व्यवहार रखें।
राजनीतिक मायने गहरे
राजनीतिक हलकों में यह बयान सिर्फ़ प्रशासनिक सलाह नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर चल रही खींचतान और संदेशों की राजनीति के रूप में देखा जा रहा है। अर्धसत्य इसलिए भी, क्योंकि मौजूदा दौर में “पूर्ण सत्य” से लगभग सभी वाक़िफ़ हैं।
अब देखना होगा कि इस बयान के बाद प्रशासनिक और सियासी स्तर पर क्या हलचल सामने आती है।
Back to top button