:जौनपुर

जौनपुर पीडब्ल्यूडी एक्सईएन कार्यालय में बवाल, अकाउंटेंट की पिटाई के बाद पलटा मामला, एक्सईएन ने लेखाधिकारी पर दर्ज कराई एफआईआर

वेतन बिल पर हस्ताक्षर को लेकर विवाद, जातिसूचक गाली और धमकी का आरोप, पुलिस जांच के घेरे में दोनों पक्ष

जन एक्सप्रेस। जौनपुर

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रान्तीय खंड कार्यालय में शुक्रवार को हुई मारपीट की घटना ने नया मोड़ ले लिया है। जहां एक ओर वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी राममिलन यादव ने एक्सईएन कार्यालय में ठेकेदारों द्वारा पिटाई का आरोप लगाया है, वहीं अब अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) राजेंद्र कुमार ने लेखाधिकारी के खिलाफ लाइन बाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। इस दोतरफा आरोप-प्रत्यारोप से विभागीय हलकों से लेकर प्रशासन तक में हड़कंप मचा हुआ है।

वेतन बिल बना विवाद की जड़

एक्सईएन द्वारा दी गई प्रथम सूचना के अनुसार, 30 जनवरी 2026 को दोपहर करीब दो बजे वह माननीय जिला जज की बैठक में शामिल होकर कार्यालय पहुंचे थे। उसी दौरान कार्यालय में अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन बिलों पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया चल रही थी। बताया गया कि पूर्व में जारी आदेश के तहत एक सहायक अभियंता, दो अवर अभियंता और एक वरिष्ठ सहायक का वेतन रोका जाना था, जिस पर एक्सईएन ने आदेशानुसार हस्ताक्षर कर दिए।इसी क्रम में वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी राममिलन यादव का भी एक दिन का वेतन रोके जाने का आदेश था, लेकिन उनके वेतन बिल पर हस्ताक्षर नहीं थे। जब इस संबंध में उनसे पूछा गया तो उन्होंने बिना रुके पूरे माह का वेतन आहरित कराने पर जोर दिया।

बातचीत से बढ़ा वाद-विवाद

एक्सईएन का आरोप है कि उन्होंने लेखाधिकारी से कहा कि जब तक एक दिन का अवकाश स्वीकृत नहीं हो जाता, तब तक शेष दिनों का वेतन ले लें और बिल पर हस्ताक्षर कर दें। इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते वाद-विवाद में बदल गई।
आरोप है कि इसी दौरान वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी राममिलन यादव आपा खो बैठे और एक्सईएन को जातिसूचक शब्दों के साथ गाली-गलौज करने लगे। इतना ही नहीं, जान से मारने की धमकी भी दी गई। मौके पर मौजूद कार्यालय स्टाफ ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया।

एक्सईएन ने लेखाधिकारी पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की एफआईआर दर्ज

घटना से आहत एक्सईएन राजेंद्र कुमार ने लाइन बाजार थाने में तहरीर देकर लेखाधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। तहरीर में स्पष्ट रूप से जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और धमकी का उल्लेख किया गया है। पुलिस का कहना है कि तहरीर के आधार पर विधिक परीक्षण कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

पहले पिटाई का आरोप, अब पलटा मामला

उधर, लेखाधिकारी राममिलन यादव पहले ही मीडिया को बयान देकर आरोप लगा चुके हैं कि एक्सईएन के चैंबर में कुछ ठेकेदारों ने उन्हें कमरे में बंद कर लात-घूंसों से पीटा। उन्होंने इस घटना के पीछे  सत्ता पक्ष के दो विधायक के करीबी लोगों की भूमिका होने की बात भी कही थी। लेखाधिकारी का कहना है कि उन पर गलत तरीके से साइन कराने का दबाव बनाया जा रहा था।

अकाउंटें का पुराना है विवाद

बताया जा रहा है कि लेखाधिकारी और विभागीय अधिकारियों व ठेकेदारों के बीच विवाद करीब एक वर्ष से चला आ रहा है। पूर्व में ठेकेदारों की शिकायत पर शाहगंज विधायक रमेश सिंह द्वारा शासन स्तर पर जांच की मांग भी की गई थी। हालांकि जांच नहीं हुई, लेकिन लेखाधिकारी का तबादला किया गया, जिसे बाद में उच्च न्यायालय से स्थगित करा लिया गया।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर ब्यूरोक्रेसी, जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के बीच टकराव को उजागर कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में इसे सत्ता पक्ष के भीतर बढ़ते असंतोष से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

पुलिस जांच जारी

फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। पीडब्ल्यूडी कार्यालय में हुई इस घटना ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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