उत्तरकाशीउत्तराखंड

रेस्क्यू में मौसम बना रोड़ा, फंसे 49 की तलाश जारी

सेना के हेलिकॉप्टर नहीं भर सके उड़ान, ड्रोन, डॉग स्क्वॉड और GPR रडार से मलबे में दबे लोगों की खोज तेज़

जन एक्सप्रेस उत्तरकाशी/धराली: धराली आपदा के छठे दिन रविवार को राहत और बचाव कार्यों को मौसम ने बड़ा झटका दिया। भारी बादलों और खराब दृश्यता के कारण सेना के हेलिकॉप्टर चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी से उड़ान नहीं भर सके, जिससे हर्षिल घाटी और आस-पास के इलाकों में फंसे लोगों का रेस्क्यू रुक गया।शनिवार को जहां 480 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, वहीं अब भी 49 लोगों की तलाश जारी है। खराब मौसम के चलते ज़मीन पर राहत दलों ने ड्रोन, डॉग स्क्वॉड, और अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से मलबे में दबे संभावित लोगों की खोज तेज़ कर दी है।

फौरी राहत और तकनीकी सहायता बढ़ी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को उत्तरकाशी, सैंजी और बांकुड़ा गांवों में प्रभावितों के लिए 5-5 लाख रुपये की त्वरित सहायता की घोषणा की। साथ ही हैदराबाद से मंगवाया गया GPR (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार) अब सर्च ऑपरेशन में मदद करेगा। इससे मलबे के नीचे दबे संभावित जीवन संकेतों की पहचान करना आसान होगा इसके अलावा, पुनर्वास और आजीविका के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन भी कर दिया गया है, जो प्रभावितों की दीर्घकालिक सहायता पर काम करेगी।

सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट, चार पर मुकदमा

धराली आपदा को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों और भड़काऊ बयानों के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस ने चार लोगों पर केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, कुछ पोस्ट में आपदा को धार्मिक रंग देने की कोशिश की गई थी, जिसे गंभीरता से लेते हुए देहरादून कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ है।

पुलिस की चेतावनी: किसी भी तरह की भ्रामक, आपत्तिजनक और संवेदनशील पोस्ट पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एक नज़र में: धराली आपदा रेस्क्यू अपडेट

रेस्क्यू का छठा दिन, खराब मौसम से हेली ऑपरेशन रुका

अब तक कुल 1,500+ लोगों का रेस्क्यू, शनिवार को 480 निकाले गए

49 लोग अब भी लापता, तलाश ज़ोरों पर

सेना, NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय प्रशासन सक्रिय

ड्रोन, डॉग स्क्वॉड और GPR रडार से मलबा खंगाला जा रहा

CM धामी की घोषणा: मृतकों के परिजनों और मकान क्षति वालों को ₹5 लाख की सहायता

सोशल मीडिया पर कार्रवाई: 4 के खिलाफ केस दर्ज

धराली में अभी भी फंसी हैं कई उम्मीदें, प्रशासन के लिए चुनौती और संवेदना दोनों की कसौटी

धराली की त्रासदी सिर्फ एक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक क्षमता, मानवीयता और तकनीकी संसाधनों की एक कठिन परीक्षा बनकर सामने आई है। समय की मांग है कि रेस्क्यू ऑपरेशन में और तीव्रता लाई जाए और पीड़ितों की आवाज़ को संवेदनशीलता से सुना जाए।

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