
जन एक्सप्रेस/हरिद्वार: श्रीअरविंद सोसायटी उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड राज्य समिति द्वारा एरोवैली आश्रम में वार्षिक सम्मेलन-2026 का आयोजन हुआ। सम्मेलन का उद्देश्य सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन पर विचार-विमर्श करना था। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, सामूहिक ध्यान के साथ हुआ। इसमें देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं प्रख्यात आध्यात्मिक ङ्क्षचतक डॉ. चिन्मय पंड्या की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष ऊर्जा प्रदान की।
मुख्य अतिथि की आसंदी से प्रख्यात आध्यात्मिक चिंतक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने वसुधैव कुटुंबकम की भावना पर जोर देते हुए कहा कि आध्यात्मिक चेतना, मानवीय मूल्यों की पुनस्र्थापना और वैज्ञानिक अध्यात्म वर्तमान युग की अनिवार्यता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण जैसे आदर्शों को आत्मसात किए बिना सनातन धर्म की वास्तविक आत्मा को समझना और जीवन में साकार करना असंभव है।
सम्मेलन में विचार-विमर्श के दौरान उपस्थित विद्वानों ने समाज में सकारात्मक परिवर्तन और नवचेतना लाने के मार्गों पर चर्चा की। इस दौरान आश्रम के वरिष्ठ संत ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ पण्ड्या जी को शॉल आदि भेंटकर सम्मानित किया, तो वहीं डॉ पण्ड्या ने भी सम्मेलन में आये अनेक संतों को गायत्री महामंत्र लिखिल चादर व अन्य भेंट किया। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। इस दौरान श्री अरुण व्यास, डॉ. एम. के. झा, विष्णु प्रकाश गोयल, डॉ. जे. पी. सिंह, स्वामी ब्रह्मदेव, डॉ. अनिल वाजपेयी एवं अनिता बंसल सहित अनेक संत, विद्वान और गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की।






