उत्तर प्रदेशचित्रकूट

मंत्री आशीष पटेल के संरक्षण में घोटालेबाज सचिव की दबंग ‘री-एंट्री’, योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस पर बड़ा सवाल

मनरेगा में 11 लाख के गबन का आरोपी फिर उसी पंचायत में तैनात, नेताओं–अफसरों की मिलीभगत उजागर

जन एक्सप्रेस/ चित्रकूट |उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट करप्शन’ नीति चित्रकूट में दम तोड़ती नजर आ रही है। रामनगर विकासखंड में मनरेगा घोटाले के आरोपी ग्राम सचिव आलोक सिंह को न सिर्फ कार्रवाई से बचाया गया, बल्कि उसी ब्लॉक और उसी ग्राम पंचायत में दोबारा तैनाती देकर भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण दे दिया गया।यह पूरा मामला अब सीधे तौर पर अपना दल (एस) के कद्दावर मंत्री आशीष पटेल से जुड़ता नजर आ रहा है।

मंत्री पर सीधा आरोप: रिश्तेदार को बचाने के लिए ट्रांसफर रोका
सूत्रों के अनुसार, मनरेगा घोटाले का आरोपी सचिव आलोक सिंह, मंत्री आशीष पटेल का रिश्तेदार बताया जाता है। आरोप है कि इसी नजदीकी रिश्ते और राजनीतिक दबाव के चलते— आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं जांच फाइलों में दबा दी गई और आरोपी को फिर से मलाईदार पोस्टिंग दे दी गई !

ऑडियो ने बढ़ाया बवाल:“हां, मैंने ट्रांसफर रुकवाया… क्या कर लोगे?” – मंत्री आशीष पटेल
मामले में उस वक्त सनसनी फैल गई जब पत्रकार और मंत्री आशीष पटेल के बीच फोन पर हुई बातचीत का ऑडियो सामने आया।ऑडियो में मंत्री कथित तौर पर यह स्वीकार करते सुने गए कि—“हां, मैंने ट्रांसफर रुकवाया है… क्या करोगे?”
बातचीत के दौरान माहौल इतना गर्म हो गया कि मंत्री ने अंततः फोन काट दिया।इस ऑडियो ने शासन-प्रशासन और सत्ता की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मनरेगा में 11 लाख का गबन, फिर भी ‘क्लीन चिट’ का खेल

रामनगर विकासखंड में तैनाती के दौरान सचिव आलोक सिंह पर—₹11 लाख से अधिक के गबनफर्जी मजदूरों के भुगतान
नियमों की खुली अनदेखीजैसे गंभीर आरोप लगे थे। इस घोटाले को लेकर सांसदों और विधायकों ने भी लिखित शिकायतें भेजीं, लेकिन सब बेअसर रहीं।

अपना दल के विधायक ने ही की कार्रवाई की मांग
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अपना दल के विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी ने वीडियो के आधार पर सचिव को हटाने और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पत्र लिखा पूर्व सांसद भैरव प्रसाद मिश्र ने भी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को पत्र भेजकर सख्त कार्रवाई की मांग कीइसके बावजूद आरोपी सचिव को इनाम के तौर पर दोबारा तैनाती दे दी गई।

वही ब्लॉक, वही पंचायत, वही सचिव – नियमों की खुली धज्जियां
सबसे बड़ा सवाल यह है कि— जिस जगह से घोटाला उजागर हुआ उसी जगह फिर से आरोपी को क्यों भेजा गया?यह फैसला न केवल सरकारी सेवा नियमों के खिलाफ है, बल्कि भ्रष्टाचार को खुली छूट देने जैसा माना जा रहा है।

डीएम के सख्त तेवर भी पड़े फीके

जिलाधिकारी पुलकित गर्ग द्वारा सख्ती के संकेत दिए गए थे, लेकिन राजनीतिक संरक्षण के आगे प्रशासन की सख्ती हवा हो गई और मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया

चित्रकूट में घोटालों की कतार:

ट्रेजरी से एंटी करप्शन तक हाल ही में ट्रेजरी घोटाला लगातार एंटी करप्शन टीम की छापेमारीअधिकारियों–कर्मचारियों की गिरफ्तारी इसके बावजूद अगर दावा किया जाए कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस है, तो इसे जनता के साथ खुला अन्याय माना जा रहा है। अब पूरे प्रदेश में गूंजते सवाल क्या मंत्री के रिश्तेदार होने से कानून बदल जाता है?क्या योगी सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति चित्रकूट में फेल हो गई है?क्या चित्रकूट अब भ्रष्टाचार का सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है?स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में भी कार्रवाई नहीं हुई, तो ईमानदार कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा और भ्रष्टाचार को स्थायी संरक्षण मिल जाएगा क्या इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी,या फिर एक बार फिर भ्रष्टाचार की फाइलें धूल फांकती रहेंगी?

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