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हमीरपुर में दबंगों का आतंक: किसान की लाही की फसल काटी, पुलिस बनी रही मूकदर्शक

हमीरपुर के कुरारा थाना क्षेत्र में दबंगों द्वारा किसान की खड़ी लाही की फसल काटे जाने का मामला सामने आया है।

हमीरपुर, जन एक्सप्रेस। जिले के कुरारा थाना क्षेत्र के पतारा डांडा गांव में दबंगों की दबंगई का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक किसान की खड़ी लाही (सरसों) की फसल को जबरन काट लिया गया। आरोप है कि इस पूरे मामले में कुरारा पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और मूकदर्शक बनी रही।

पीड़ित किसान अंकित सिंह यादव ने चित्रकूट मंडल के कमिश्नर को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि उसकी कृषि भूमि गाटा संख्या 3028 (रकबा 0.6070 हेक्टेयर) और गाटा संख्या 3056 (रकबा 0.2140 हेक्टेयर) में स्थित है। इस भूमि पर उसने लाही की फसल बोई थी, जो पूरी तरह तैयार थी।

किसान का आरोप है कि 11 और 23 मार्च को गांव के ही कुछ दबंग लोग—छुटकू निषाद, पब्बा, अशोक, अनिल, सुमन, रामबाबू और श्रीवती—ने मिलकर उसकी खड़ी फसल को जबरन काट लिया। जब उसने इसका विरोध किया तो उसे जान से मारने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपियों में से एक व्यक्ति उम्रकैद की सजा पा चुका है और वर्तमान में अपील पर बाहर है। वह अक्सर बाबा का चोला धारण कर क्षेत्र में प्रभाव जमाने का प्रयास करता है और भूमाफिया गतिविधियों में लिप्त बताया जाता है।

पीड़ित किसान का कहना है कि उसने इस घटना की जानकारी कुरारा पुलिस को दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे दबंगों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। किसान ने आरोप लगाया कि पुलिस की निष्क्रियता के कारण उसे लगातार भय और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

इस घटना से क्षेत्र के किसानों में भी रोष है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता है, तो इस तरह की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है।

अंकित सिंह यादव ने कमिश्नर से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, दबंगों द्वारा काटी गई फसल का मुआवजा दिलाने की भी मांग की है।

यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि किसानों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित किसान को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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