
जन एक्सप्रेस, देहरादून। धराली की जलप्रलय ने उत्तरकाशी को गहरे जख्म दिए, लेकिन गुरुवार की सुबह उम्मीदों की किरण लेकर आई। मौसम खुलते ही राहत और बचाव कार्यों ने रफ्तार पकड़ी। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना और आईटीबीपी की टीमें मलबे में दबी जिंदगियों को तलाशने और पीड़ितों को सुरक्षित निकालने में दिन-रात जुट गईं।
संचार और बिजली की बहाली के लिए चिनूक से भेजा गया जनरेटर
धराली क्षेत्र में संचार सेवा पूरी तरह ठप हो चुकी थी। इसे बहाल करने के लिए वायु सेना का चिनूक हेलीकॉप्टर गुरुवार को 125 केवी का जनरेटर लेकर पहुंचा। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे ने बताया कि वैकल्पिक बिजली व्यवस्था के जरिए संचार व राहत कार्यों में तेजी लाई जा रही है।
गंगोत्री हाईवे फिर हुआ चालू, प्रशासन ने पहुंचाई राहत सामग्री
गंगोत्री हाईवे पर भटवाड़ी और गंगनानी के बीच टूटा 50 मीटर का हिस्सा बीआरओ ने दुरुस्त कर यातायात बहाल कर दिया। प्रशासन ने आपदा प्रभावितों तक राशन, दवाएं और पशुओं के लिए चारा पहुंचाना शुरू कर दिया है।
धराली व हर्षिल में 70 से अधिक घायलों का इलाज, पांच गंभीर मरीज एम्स रेफर
स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार मेडिकल कैंप चला रही हैं। 70 से अधिक घायलों का इलाज धराली और हर्षिल में किया गया, जबकि पांच गंभीर घायलों को एम्स ऋषिकेश और एमएच देहरादून रेफर किया गया है। साथ ही, मनोचिकित्सकों की टीम भी काउंसलिंग के लिए तैनात कर दी गई है।
आईएएस अफसर देंगे एक दिन का वेतन, मुख्यमंत्री राहत कोष में जाएगा योगदान
उत्तराखंड आईएएस एसोसिएशन ने आपदा राहत में सहयोग के लिए एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का निर्णय लिया है। यह फैसला एसोसिएशन की बैठक में अध्यक्ष एलए फैनई की अध्यक्षता में लिया गया।
रेस्क्यू ऑपरेशन में तैनात होंगे हेलीकॉप्टर, चिन्यालीसौड़ में रहेगा बेस
मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने बताया कि अब से चिनूक और एमआई-17 हेलीकॉप्टर चिन्यालीसौड़ में ही तैनात रहेंगे, जिससे राहत कार्यों में लगने वाला समय कम किया जा सके।
हर गतिविधि पर निगरानी, स्निफर डॉग भी रेस्क्यू में जुटे
घटनास्थल पर तैनात अधिकारियों ने बताया कि स्निफर डॉग्स मलबे में दबी संभावित जिंदगियों की तलाश में जुटे हैं। साथ ही जेसीबी, क्रेन, जनरेटर और नेटवर्क टावर जैसी सुविधाएं भी मौके पर पहुंचा दी गई हैं। धराली की त्रासदी के बाद अब राहत और बचाव कार्यों ने रफ्तार पकड़ ली है। सरकारी मशीनरी, सेना, राहत एजेंसियों और आम जनता की साझा कोशिशों से एक बार फिर उम्मीदों का सूरज उत्तरकाशी में चमकने लगा है।






