उत्तर प्रदेशचित्रकूटराज्य खबरें

22 लाख दीपदान पर बवाल: चित्रकूट में आस्था बनाम आंकड़ों की जंग, वसूली और पारदर्शिता पर घिरे जिम्मेदार

जन एक्सप्रेस/चित्रकूट: धर्मनगरी चित्रकूट में चर्चित “22 लाख दीपदान” आयोजन अब सियासी और प्रशासनिक विवादों के केंद्र में आ गया है। जहां एक ओर इस आयोजन को आस्था और धार्मिक गौरव से जोड़कर प्रचारित किया गया, वहीं दूसरी ओर अब इसके आंकड़ों और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा और समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष अनुज यादव के आरोपों ने पूरे मामले को तूल दे दिया है, जिससे प्रशासन और आयोजकों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा ने भगवान कामतानाथ स्वामी को पत्र लिखकर “22 लाख दीपदान” के दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि धार्मिक आस्था के नाम पर आंकड़ों की बाजीगरी उचित नहीं है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों को जवाबदेह ठहराने की मांग की है। उनका कहना है कि आस्था के नाम पर यदि जनता को गुमराह किया गया है तो यह बेहद गंभीर मामला है।


मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष अनुज यादव ने आरोप लगाया कि दीपदान आयोजन के नाम पर ग्राम पंचायतों के सचिवों और प्रधानों से जबरन दो-दो हजार रुपये की वसूली की गई। उन्होंने कहा कि यदि वसूली के बावजूद भी 22 लाख दीप जलाने का दावा सही साबित नहीं हो पा रहा है, तो यह आयोजन की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
स्थानीय श्रद्धालुओं और नागरिकों में भी इस पूरे प्रकरण को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक प्रचार और आंकड़ों की प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। यदि वसूली और फर्जी आंकड़ों के आरोप सही हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही है बल्कि आस्था के साथ भी अन्याय है।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन फिलहाल पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है, लेकिन आधिकारिक रूप से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह विवाद भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
चित्रकूट में “22 लाख दीपदान” का मुद्दा अब जनचर्चा का बड़ा विषय बन चुका है। लोग प्रशासन से पारदर्शी जांच और स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं, ताकि धार्मिक आयोजनों की गरिमा और जनता का विश्वास बना रह सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button