उत्तरकाशी: नाबार्ड की पहल से आत्मनिर्भर बनेंगी नेताला की महिलाएं, सोयाबीन प्रसंस्करण प्रशिक्षण का हुआ समापन

जन एक्सप्रेस/उत्तरकाशी: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से नाबार्ड (NABARD) द्वारा भटवाड़ी विकासखंड के नेताला गांव में आयोजित 15 दिवसीय ‘सूक्ष्म उद्यमिता विकास कार्यक्रम’ का सफलतापूर्वक समापन हो गया। अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष-2026 के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष शिविर में गांव की 37 महिलाओं ने सोयाबीन के विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों को बनाने का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।
सोयाबीन से बनेंगे टोफू, पनीर और प्रोटीन पाउडर
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को सोयाबीन के बहुआयामी उपयोगों के बारे में विस्तार से बताया गया। प्रशिक्षार्थियों ने सोयाबीन से सोया मिल्क, दही, टोफू (सोया पनीर), सोया चाप और प्रोटीन पाउडर जैसे उच्च मांग वाले उत्पादों के निर्माण की विधि सीखी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उत्पादों की बाजार में बढ़ती मांग से स्थानीय स्तर पर महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
सरकारी योजनाओं से जुड़कर मिलेगा लाभ
समापन समारोह के मुख्य अतिथि, अजय सिंह (परियोजना निदेशक, डीआरडीए) ने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपनी प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने विशेष रूप से PMFME योजना (प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना) और MSY योजना के लाभों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नेताला जैसे पर्यटन प्रधान क्षेत्र में इन उत्पादों का बेहतर विपणन (Marketing) कर स्थानीय महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकती हैं।
बैंक और विभाग का मिला सहयोग
कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक पारित गुप्ता ने बताया कि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग ही आत्मनिर्भरता की कुंजी है। प्रशिक्षण में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी शिरकत की:
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जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रजनीश सिंह और जिला उद्योग विभाग के दीपेश चौधरी ने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।
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जिला अग्रणी बैंक और उत्तरकाशी जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों ने सूक्ष्म उद्यमों के लिए ऋण (Loan) सुविधाओं के बारे में मार्गदर्शन किया।
पैकेजिंग और मार्केटिंग पर जोर
रेनुका समिति मातली के अध्यक्ष प्रज्ज्वल उनियाल ने आश्वासन दिया कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को उत्पादों की पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और मार्केटिंग के लिए भी सहायता प्रदान की जाएगी। इससे महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों में, बल्कि शहरों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी बेचे जा सकेंगे।
इस अवसर पर सभी प्रशिक्षु महिलाएं, स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल की सराहना की।






