
जन एक्सप्रेस /विकास नगर :- 535 करोड़ की सीवर एवं पेयजल महापरियोजना अब विवादों के घेरे में आ गई है। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार कंपनी और कार्यदायी संस्था की भारी लापरवाही तथा जल्दबाजी के चलते पूरे नगर की सड़कें बदहाल हो गई हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग समेत नगरपालिका क्षेत्र की सड़कें धंस रही हैं, जगह-जगह कीचड़ और पानी जमा हो रहा है तथा गहरे गड्ढे और ऊंचे चैंबर दुर्घटना का खतरा बढ़ा रहे हैं।
यूकेडी विकास नगर शहर के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य अरविंद तोमर ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर पूरी योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय निवासियों ने भी हस्ताक्षरयुक्त सूची के जरिए इस मांग का समर्थन किया है।
अरविंद तोमर का आरोप है कि महीनों तक काम बेहद धीमी गति से चल रहा था। लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए क्षेत्रीय नेताओं के कथित राजनीतिक दबाव में अचानक पूरे नगरपालिका क्षेत्र में एक साथ सड़कों की खुदाई शुरू कर दी गई। बरसात के मौसम में इतने बड़े पैमाने पर खुदाई करने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था और सुरक्षा उपायों का ध्यान नहीं रखा गया। नतीजा यह हुआ कि खोदी गई सड़कें धंसने लगीं, कीचड़ और पानी जमा हो गया तथा राहगीरों, दोपहिया और अन्य वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई जगहों पर सड़क के बीच गहरे गड्ढे छोड़ दिए गए हैं। सीवर लाइन के चैंबर सड़क की सतह से काफी ऊंचे हैं। इससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। पार्टी का कहना है कि स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कई स्थानों पर पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है। रोजाना आम लोग इन समस्याओं से जूझ रहे हैं।
यूकेडी ने स्थानीय प्रशासन द्वारा गठित जांच कमेटी की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि जांच की जिम्मेदारी उन्हीं अधिकारियों को सौंपी गई है जो योजना की निगरानी कर रहे थे। ऐसे में जांच में प्रशासनिक या राजनीतिक प्रभाव की आशंका बनी रहती है। करोड़ों रुपये की इस महापरियोजना में जनता की सुरक्षा और सरकारी धन दोनों दांव पर हैं। इसलिए जांच पूरी तरह स्वतंत्र और पारदर्शी होनी चाहिए।
अरविंद तोमर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मौजूदा स्थानीय जांच कमेटी को तत्काल हटाकर मामला किसी स्वतंत्र बाहरी तकनीकी संस्थान को सौंपा जाए। जांच में यह साफ होना चाहिए कि तकनीकी मानकों, सड़क खुदाई-पुनर्निर्माण के नियमों और बरसात में काम करने के सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं। अगर किसी अधिकारी, ठेकेदार कंपनी या एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही खोदी गई सड़कों को तुरंत सुरक्षित और आवागमन योग्य बनाया जाए, गड्ढों को भरा जाए और ऊंचे चैंबरों को सही स्तर पर लाया जाए।
ज्ञापन देने वालों में भूपेंद्र सिंह नेगी, अनिल पवार, अक्षय रवि पाल, यशपाल सिंह नेगी, हर्षित चौधरी, आयुष राणा, आदर्श चौहान, प्रियांशु, प्रेम सिंह, तुषार शर्मा, गौरव राणा, प्रज्वल महेश्वरी, जगदीश सिंह भंडारी, दीपक कुमार, सुरेंद्र बिष्ट, रेखा, सीमा कुकरेती, शोभा जोशी, पूनम रावत, विमला कंडवाल, सुनीता रावत, किरण पंवार, बीना पंवार, चित्रा पैन्यूली, सुमन रावत, शोभा रावत, दरवान सिंह रावत, अवतार सिंह गुसाईं, राधा देवी, रंजना बडोनी, सुरहित कुमार, अमर देव जोशी, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, पूरण प्रसाद भट्ट, उषा बिष्ट, शशी बिष्ट, रेखा सजवाण और रितु ठाकुर समेत कई स्थानीय लोग शामिल रहे।
अरविंद तोमर ने कहा कि विकास योजनाएं जनता की सुविधा के लिए होती हैं। अगर निर्माण कार्यों की वजह से ही जनता को परेशानी और दुर्घटना का सामना करना पड़े तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यूकेडी और क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री से पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की है।
क्या बरसात में अंधाधुंध खुदाई और सड़कों की यह हालत सिर्फ लापरवाही है या चुनावी जल्दबाजी का नतीजा? विकास नगर की जनता अब जवाब मांग रही है।






