चित्रकूट में धर्मनगरी में बाढ़ का रौद्र रूप, यूपी-एमपी संपर्क प्रभावित, कई गांव खाली कराए गए

जन एक्सप्रेस /चित्रकूट :- धर्मनगरी चित्रकूट इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में है। कल तक जिस रामघाट पर मंदाकिनी आरती के दीपों से जगमगाती थी, आज वहां नदी करीब 30 फीट तक उफान पर बह रही है। मंदाकिनी के इस विकराल रूप ने चित्रकूट के जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी भयावह बाढ़ कभी नहीं देखी।शुक्रवार रात से शुरू हुई लगातार तेज बारिश ने शनिवार दोपहर तक हालात पूरी तरह बदल दिए। रामघाट पर मंदाकिनी नदी का खतरे का निशान 126.50 मीटर है, जबकि शनिवार दोपहर जलस्तर 134.900 मीटर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई। इस तरह नदी खतरे के निशान से 8 मीटर से अधिक ऊपर बह रही है। बताया जा रहा है कि बाढ़ ने वर्ष 2003 के बड़े बाढ़ रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।

रामघाट जलमग्न, पुल बहने और बांध टूटने से हालात बिगड़े
भीषण बाढ़ के चलते रामघाट पूरी तरह जलमग्न हो गया है। क्षेत्र में करीब 300 मीटर लंबा पुल बाढ़ की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त और बहने की सूचना है। वहीं गोरगी बांध टूटने से आसपास के इलाकों में संकट और गहरा गया है, जबकि टिकरिया डोंडा बांध को लेकर भी खतरे की स्थिति बनी हुई है।सुरक्षा को देखते हुए चार गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। कई इलाकों में लोग अपने घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

रेल और सड़क संपर्क प्रभावित, यूपी-एमपी के बीच आवागमन बाधित
शरभंग नदी के उफान का असर रेल यातायात पर भी पड़ा है। मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग प्रभावित होने से कई ट्रेनों को रोका गया है। वहीं चित्रकूट-सतना मार्ग बंद होने से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है।कई स्थानों पर सड़कें पानी में डूब गई हैं और हालात ऐसे बन गए हैं कि सामान्य आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नावों के सहारे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

दुकानें, आश्रम और होटल जलमग्न
सीतापुर, पुरानी लंका, आरोग्यधाम, तरौंहा, कटरा गूदर सहित कई क्षेत्रों में चारों ओर पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। बाढ़ का पानी दुकानों, आश्रमों और होटलों तक पहुंच गया है। धार्मिक और सामाजिक संस्थानों के साथ ही तुलसी पीठ और दीनदयाल शोध संस्थान से जुड़े क्षेत्रों पर भी बाढ़ का असर पड़ा है।चित्रकूट में बाढ़ केवल घरों और सड़कों तक सीमित संकट नहीं है। इसका सीधा असर धर्मनगरी की आस्था, पर्यटन, स्थानीय कारोबार और हजारों लोगों की आजीविका पर पड़ रहा है।

हर साल की बाढ़ को चेतावनी मानने की जरूरत
चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ना कोई नई बात नहीं है। लगभग हर वर्ष बारिश के दौरान नदी उफनती है और रामघाट सहित आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंच जाता है। लेकिन इस बार की भयावह स्थिति ने व्यवस्थाओं और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में अनियंत्रित कटान, नदी के कैचमेंट क्षेत्र में अतिक्रमण तथा छोटे बांधों के रखरखाव और निगरानी जैसे मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है। गोरगी जैसे बांध का टूटना केवल भारी बारिश का परिणाम मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में संरचनाओं के रखरखाव और समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण की आवश्यकता भी सामने आती है।

एनडीआरएफ और प्रशासन राहत कार्य में जुटा
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। एनडीआरएफ की मदद ली जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने की है।

सिर्फ आपदा नहीं, भविष्य के लिए चेतावनी
चित्रकूट की यह बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। मंदाकिनी केवल एक नदी नहीं, बल्कि चित्रकूट की आस्था, संस्कृति, पर्यटन और जीवन का आधार है।जरूरत इस बात की है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी इस त्रासदी को भुलाया न जाए। नदी के कैचमेंट क्षेत्र के संरक्षण, अतिक्रमण पर नियंत्रण, बांधों के नियमित निरीक्षण, मजबूत जल निकासी व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों के लिए ठोस बाढ़ प्रबंधन योजना पर गंभीरता से काम करना होगा






