
जन एक्सप्रेस /लखनऊ :- सोशल मीडिया पर इन दिनों मगावा नाम के एक खास चूहे की रिटायरमेंट की खबर चर्चा में है। लेकिन मगावा कोई आम चूहा नहीं था। वह एक प्रशिक्षित अफ्रीकन जायंट पाउच्ड रैट था, जिसने कंबोडिया में वर्षों तक लैंडमाइन और बिना विस्फोट हुए हथियारों का पता लगाने का काम किया।
मगावा को बेल्जियम की संस्था APOPO ने विशेष प्रशिक्षण दिया था। उसकी सूंघने की असाधारण क्षमता का इस्तेमाल जमीन में दबे विस्फोटकों का पता लगाने के लिए किया जाता था। खास बात यह थी कि उसका हल्का वजन लैंडमाइन को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त नहीं होता था, जिससे वह खतरनाक इलाकों में इंसानों की तुलना में कम जोखिम के साथ काम कर सकता था।
कैसे बना ‘हीरो रैट’?
मगावा का जन्म तंजानिया में हुआ था। APOPO ने उसे खाने के इनाम और क्लिकर ट्रेनिंग के जरिए प्रशिक्षित किया। उसे विस्फोटकों में मौजूद रासायनिक तत्वों की गंध पहचानना सिखाया गया था।
जब मगावा को किसी विस्फोटक की गंध मिलती, तो वह रुककर या जमीन को खरोंचकर अपने प्रशिक्षकों को संकेत देता था। इसके बाद विशेषज्ञ उस स्थान की जांच करते थे।
पांच साल तक कंबोडिया में किया काम
मगावा ने वर्ष 2016 से कंबोडिया के सिएम रीप इलाके में लैंडमाइन का पता लगाने का काम शुरू किया। दशकों पुराने संघर्षों के कारण कंबोडिया के कई हिस्सों में आज भी जमीन के नीचे लैंडमाइन और बिना विस्फोट हुए हथियार मौजूद हैं।
अपने करीब पांच साल के कार्यकाल में मगावा ने 71 लैंडमाइन और 38 बिना विस्फोट हुए हथियारों का पता लगाने में मदद की। उसने लगभग 1.41 लाख वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन को साफ करने में योगदान दिया।
उसकी खासियत यह थी कि वह करीब 30 मिनट में टेनिस कोर्ट के बराबर क्षेत्र की जांच कर सकता था। यही काम पारंपरिक मेटल डिटेक्टर के जरिए करने में इंसानों को काफी अधिक समय लग सकता था।
बहादुरी के लिए मिला गोल्ड मेडल
मगावा की उपलब्धियों को देखते हुए वर्ष 2020 में ब्रिटेन की पशु कल्याण संस्था PDSA ने उसे प्रतिष्ठित PDSA Gold Medal से सम्मानित किया।
मगावा इस सम्मान को पाने वाला पहला चूहा बना। यह मेडल जानवरों की असाधारण बहादुरी और ड्यूटी के प्रति समर्पण के लिए दिया जाता है।
सात साल की उम्र में रिटायरमेंट
लगातार काम करने के बाद मगावा ने वर्ष 2021 में करीब सात साल की उम्र में रिटायरमेंट ले लिया। APOPO के मुताबिक, वह स्वस्थ था, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उसकी रफ्तार कुछ कम हो गई थी।
रिटायरमेंट के बाद उसने कुछ समय तक युवा चूहों को प्रशिक्षण देने में भी मदद की। उसे केले, मूंगफली और दूसरे मौसमी फल पसंद थे।
2022 में हुई मौत
रिटायरमेंट के करीब एक साल बाद, वर्ष 2022 की शुरुआत में मगावा की मौत हो गई। उसकी उम्र लगभग आठ साल थी, जिसे इस प्रजाति के लिए सामान्य जीवनकाल माना जाता है।
मगावा की कहानी इस बात की मिसाल है कि सही प्रशिक्षण और प्राकृतिक क्षमताओं के जरिए जानवर भी इंसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण काम कर सकते हैं। कंबोडिया में लैंडमाइन की पहचान के दौरान उसके योगदान ने खतरनाक जमीन को सुरक्षित बनाने और लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।






