उन्नाव में बूचड़खानों पर फिर उठे सवाल! साक्षी महाराज बोले- “मैं खुद कष्ट में हूं, हटा नहीं पाया”

जिला संवाददाता – पंकज यादव
जन एक्सप्रेस/ उन्नाव: दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित बूचड़खानों और उनसे जुड़े पशु-अवशेष प्रसंस्करण कार्यों को लेकर एक बार फिर प्रदूषण, दुर्गंध और आसपास रहने वाली आबादी के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों का मुद्दा सामने आया है। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर आसपास रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि बूचड़खानों से निकलने वाले अपशिष्ट, दुर्गंध और संभावित प्रदूषण की नियमित निगरानी तथा प्रभावी निस्तारण व्यवस्था सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
दही चौकी क्षेत्र में प्रदूषण और दुर्गंध की शिकायतों को लेकर पूर्व में भी प्रशासन कार्रवाई कर चुका है। नवंबर 2021 में जिलाधिकारी के निर्देश पर दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र की जांच कराई गई थी। जांच में दो बोन मिलों में अनियमितताएं मिलने के बाद उन्हें बंद कराया गया था तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कुल 2.80 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। जांच रिपोर्ट में पशुओं की हड्डियां खुले में रखे जाने से दुर्गंध फैलने का भी उल्लेख किया गया था।
2014 में सांसद ने उठाया था बूचड़खाने बंद कराने का मुद्दा
दही चौकी क्षेत्र के बूचड़खानों को लेकर उन्नाव सांसद साक्षी महाराज के 2014 के चुनावी दौर के कथित रुख की भी अब चर्चा हो रही है। उपलब्ध हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सांसद ने 2014 में उन्नाव से पहला चुनाव लड़ते समय बूचड़खाने बंद कराने की बात कही थी। हाल में इस मुद्दे पर उनसे सवाल किए जाने पर उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अभी जारी है।
इससे स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि बूचड़खानों को लेकर वर्षों से चिंता और विरोध सामने आता रहा है तो इनके संचालन, प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट निस्तारण और आसपास के पर्यावरण की नियमित निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
अपशिष्ट से भूजल और पर्यावरण पर खतरे की आशंका
बूचड़खानों से निकलने वाले अपशिष्ट का यदि वैज्ञानिक तरीके से उपचार और निस्तारण न किया जाए तो जैविक प्रदूषण, दुर्गंध तथा जलस्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका रहती है। रक्त, वसा, पशु-अवशेष और अन्य जैविक अपशिष्ट के अनुचित निस्तारण से आसपास की मिट्टी और जलस्रोत प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि संबंधित इकाइयों के सीवेज ट्रीटमेंट, अपशिष्ट निस्तारण, जल गुणवत्ता और वायु प्रदूषण की नियमित जांच की जाए।
ग्रामीणों की मांग—हो वैज्ञानिक जांच
पूर्व में भी ग्रामीणों द्वारा मांग की जाती रही है कि दही चौकी क्षेत्र में संचालित बूचड़खानों और बोन प्रोसेसिंग इकाइयों की संयुक्त जांच कराई जाए। आसपास के गांवों के भूजल, नालों और अन्य जलस्रोतों के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच, वायु गुणवत्ता की निगरानी तथा इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट की जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रदूषण का वास्तविक स्तर कितना है और उसका आसपास के लोगों तथा पर्यावरण पर कितना प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सांसद द्वारा वर्षों पहले उठाए गए बूचड़खाना बंद कराने के मुद्दे और वर्तमान स्थिति के बीच अब प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।






