अफसरों की चाकरी में उलझे ट्रैकमैन, सुरक्षा हाशिए पर – 3300 पद रिक्त, हादसे को दावत!

जन एक्सप्रेस/लखनऊ : मल्हौर रेलवे स्टेशन के पास सोमवार को हमसफर एक्सप्रेस एक बड़े हादसे से बाल-बाल बची। ट्रैक पर रखे लोहे के एंगल से टकराव होते-होते रह गया। यह घटना एक बार फिर रेलवे ट्रैक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। सूत्रों के अनुसार, ट्रैक पेट्रोलिंग में लापरवाही और स्टाफ की भारी कमी इसके पीछे बड़ी वजह है।
रेलवे बोर्ड के मानकों के अनुसार, हर 6 किमी ट्रैक पर एक कीमैन, एक ट्रॉलीमैन और 13 ट्रैकमैन होने चाहिए, लेकिन वास्तविकता इसके उलट है। उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे में ट्रैकमैनों के करीब 3300 पद खाली हैं। उत्तर रेलवे में 1800 और पूर्वोत्तर रेलवे में 1500 पदों पर भर्ती नहीं हो पाई है।
निजी काम में उलझे ट्रैकमैन
ट्रैकमैनों का काम ट्रैक की निगरानी और मरम्मत करना है, मगर लखनऊ, बाराबंकी, निहालगढ़ और सुल्तानपुर जैसे इलाकों में ट्रैकमैन अफसरों के घरों और दफ्तरों में निजी सेवा करते देखे जा रहे हैं। रेलवे कर्मचारी ट्रैक मेंटेनर एसोसिएशन के सहायक सचिव विश्वनाथ सिंह यादव ने बताया कि करीब 30% ट्रैकमैन अफसरों की चाकरी में लगे हैं।
सुविधाओं का अभाव, जिम्मेदार चुप
ट्रैकमैनों के लिए हट, पीने का पानी और उन्नत उपकरण जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्र ने कहा कि ट्रैक की सुरक्षा के लिए देशभर में एक लाख और कर्मचारियों की तत्काल जरूरत है।
ध्यान नहीं दिया तो हो सकता है बड़ा हादसा
रेलवे यूनियनें लगातार रिक्त पद भरने की मांग कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अगर समय रहते स्थिति नहीं सुधारी गई, तो किसी दिन यह लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है।






