उत्तराखंडपौड़ी

आपदा में राखी का सहारा: संकट में भी नहीं टूटी उम्मीद की डोर

सैंजी गांव की महिलाओं ने राहत कार्यों में जुटे पुलिस और एसडीआरएफ जवानों को बांधी राखी, कहा - "वर्दी वाले भाई ही सच्चे रक्षक हैं"

जन एक्सप्रेस पौड़ी: जहां एक ओर पहाड़ की वादियों में रक्षाबंधन की मिठास घुली हुई थी, वहीं दूसरी ओर आपदा से जूझते सैंजी गांव की महिलाओं ने इस पर्व को एक नया अर्थ दे दिया। जिले के पाबौ ब्लॉक स्थित सैंजी गांव में आपदा के बीच जीवन की डोर थामे खड़ी महिलाओं ने शनिवार को राहत कार्यों में जुटे पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों की कलाई पर राखी बांधकर न केवल त्यौहार मनाया, बल्कि मानवीय रिश्तों की नई परिभाषा भी रच दी। बीते कुछ दिनों से क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण कई गांवों में हालात बिगड़े हुए हैं। सड़कें टूटी हैं, संचार व्यवस्था चरमराई हुई है और लोग अपने घरों से बेघर हो चुके हैं। ऐसे विकट हालातों में पौड़ी पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें दिन-रात राहत एवं बचाव कार्यों में लगी हुई हैं। इन्हीं कर्मठ जवानों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए गांव की महिलाओं ने राखी बांधकर उन्हें अपना ‘रक्षक भाई’ माना।

इस अवसर पर ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि “जब हमें लगा कि हम बिल्कुल अकेले हैं, तब इन वर्दीधारी भाइयों ने हमें हिम्मत दी, हाथ थामा और हर संभव मदद की।” राखी बांधते समय बहनों की आंखों में आभार और भरोसे की चमक साफ दिखाई दी।पुलिस जवानों ने भी बहनों को भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में वे चट्टान बनकर उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि “यह राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है।”यह दृश्य केवल एक पर्व का उत्सव नहीं था, बल्कि यह बताता है कि मानवता, सेवा और भाईचारे की भावना किसी भी आपदा से बड़ी होती है।

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