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लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर लगा विवादित पोस्टर, शंकराचार्य के अपमान को लेकर उठी आवाज

जन एक्सप्रेस/लखनऊ:  राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर एक पोस्टर लगाए जाने से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इस पोस्टर में धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संदेश लिखा गया है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पोस्टर पर साफ शब्दों में लिखा है— “शंकराचार्य का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान”

यह पोस्टर समाजवादी पार्टी के पूर्व छात्रसभा प्रदेश सचिव आशुतोष सिंह द्वारा लगाया गया है। पोस्टर लगने के बाद सपा कार्यालय के बाहर कुछ देर के लिए हलचल का माहौल देखने को मिला। पोस्टर में किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन संदेश के जरिए शंकराचार्य के सम्मान और धार्मिक आस्था से जुड़ा मुद्दा उठाया गया है।

आशुतोष सिंह का कहना है कि देश की धार्मिक परंपराओं और संत समाज का सम्मान हर हाल में बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जैसे महान संत और धार्मिक गुरु का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उनका यह भी कहना है कि यह पोस्टर किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश के रूप में लगाया गया है।

हालांकि, सपा कार्यालय के बाहर इस तरह का पोस्टर लगाए जाने के बाद राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर बयानबाजी और तेज हो सकती है। पोस्टर को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

पोस्टर लगाए जाने की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस भी सतर्क नजर आई। हालांकि, मौके पर किसी तरह की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति नहीं बनी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कानून व्यवस्था की समस्या नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, धार्मिक मुद्दों पर इस तरह के संदेश चुनावी माहौल में खास महत्व रखते हैं। इससे न सिर्फ जनता का ध्यान आकर्षित होता है, बल्कि राजनीतिक दलों के भीतर भी विचार-विमर्श शुरू हो जाता है।

फिलहाल, लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगाया गया यह पोस्टर सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा जरूरी संदेश बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक स्टंट के तौर पर देख रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह पोस्टर एक बार फिर यह दिखाता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और सामाजिक मुद्दे कितनी जल्दी सुर्खियों में आ जाते हैं।

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