
जन एक्सप्रे/स उत्तरकाशी: बरसात के मौसम में उत्तरकाशी की सब्जी मंडी में सब्जियों और फलों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंडी में अधिकांश दुकानों पर रेट लिस्ट तक नहीं लगी है, जिससे दुकानदार अपनी मनमर्जी से कीमतें वसूल रहे हैं। वहीं किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, जबकि उपभोक्ताओं को कई गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले सप्ताह की तुलना में कई सब्जियों के दाम दोगुने से तिगुने तक बढ़ गए हैं। बाहर की मंडियों से आने वाली सब्जियों में टमाटर ₹70-80 प्रति किलो, खीरा ₹40-60, पपीता ₹70, आम ₹100, सेब ₹250, केला ₹70 प्रति दर्जन और संतरा ₹250 प्रति किलो तक बिक रहा है। लोगों का कहना है कि यदि लगातार बारिश और सड़कें बंद होती हैं तो यही कीमतें तीन से चार गुना तक पहुंच जाती हैं।
स्थानीय सब्जियों में भी बिचौलियों का खेल
ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का आरोप है कि बिचौलिए गांवों से बेहद कम कीमत पर सब्जियां खरीदते हैं और मंडी में कई गुना अधिक दाम पर बेचते हैं। उदाहरण के तौर पर गांव में ₹25 प्रति किलो खरीदा गया टमाटर मंडी में ₹80 प्रति किलो तक बेचा जा रहा है। इसी तरह लौकी, गोभी और कद्दू जैसी सब्जियों में भी किसानों और उपभोक्ताओं के बीच भारी मूल्य अंतर देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर उठाए सवाल
स्थानीय निवासी विजेंद्र पोखरियाल ने कहा कि मंडी में प्रशासन की कोई प्रभावी निगरानी दिखाई नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि दुकानदार अपनी सुविधा के अनुसार कीमतें तय कर रहे हैं, जबकि किसान और आम उपभोक्ता दोनों नुकसान उठा रहे हैं।
प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
- सभी दुकानों पर रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य किया जाए।
- खाद्य विभाग और मंडी समिति नियमित औचक निरीक्षण करें।
- मनमाने दाम वसूलने और रेट लिस्ट न लगाने वाले दुकानदारों पर जुर्माना एवं लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई की जाए।
- बिचौलियों के नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाए।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर आम जनता की रसोई पर पड़ेगा।






