
जन एक्सप्रेस /विकासनगर :- चकराता क्षेत्र की राजनीति में सहकारी बैंक का चुनाव साधारण निदेशक चुनाव नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव का मिनी रिहर्सल बन गया। नतीजा आया तो कांग्रेस के चेहरे उतर गए और भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न छा गया। जिला सहकारी बैंक की प्रबंध समिति के निदेशक निर्वाचन में डॉ. पूजा गौड़ भारी मतों से विजयी हुईं। कांग्रेस ने इस सीट पर पूरा दांव लगाया था, भाजपा में फूट का इंतजार भी किया था, लेकिन हिसाब उलटा पड़ गया।
डॉ. गौड़ ने जीत का श्रेय अपने समर्थकों और विभिन्न सहकारी समितियों से निर्वाचित मंडल के सदस्यों को दिया। उन्होंने कहा, यह अकेली मेरी जीत नहीं है। यह उन सभी की जीत है जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया। अब सहकारिता को नई दिशा देंगे। जिन लोगों ने अपने आदमी बैठाकर संस्थाओं पर कब्जा जमाया है, सहकारिता को उनसे मुक्त कर किसान और गरीबों के हित में काम करेंगे।
कांग्रेस की रणनीति साफ थी,पूरा जोर लगाओ, भाजपा के अंदर दरार का इंतजार करो और फिर मैदान समेट लो। भाजपा ने उलटा किया। वरिष्ठ नेता एक मंच पर आए, संगठन एक रहा और कांग्रेस बुरी तरह पिट गई।
भाजपा के वरिष्ठ नेता मूरत राम शर्मा और प्रताप रावत का हमला सीधा था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस चुनाव में भी परिवारवाद को बढ़ावा दिया। मैदान में वही चेहरे उतारे जिनके परिवार पहले से पदों पर काबिज हैं। दोनों नेताओं के मुताबिक यह नतीजा 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए साफ संदेश है भाजपा एकजुट लड़ेगी और चकराता में सहकारिता की तरह विधानसभा में भी कमल खिलेगा।
पार्टी का दावा है कि इस जीत ने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया है। संदेश साफ है, फूट की आस पालने वाले इस बार खाली हाथ लौटे।इस मौके पर भाजपा नेता राजाराम, विजय पाल रावत, मंडल अध्यक्ष नीरज शर्मा, चंदर साल्टा, अनिल चौहान, अतर सिंह चौहान, ग्यार सिंह चौहान समेत कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
संक्षेप में—कांग्रेस ने परिवार की दीवार खड़ी की, भाजपा ने संगठन की दीवार। बैंक की कुर्सी डॉ. पूजा गौड़ के पास गई, और राजनीतिक संदेश चकराता से 2027 तक चला गया।






