जी-20 : भारत मंडपम में आयोजित भारत की संगीत यात्रा का बेगूसराय के लाल ने किया सह निर्देशन

बेगूसराय । राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि और बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की कर्मभूमि बेगूसराय अपने ऐतिहासिक समय से ही राष्ट्रवाद को बुलंद कर रहा है। आजादी के बाद भी राष्ट्र को प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए लगातार प्रयास करता रहा है।
इसी कड़ी में अब बीते दिनों संपन्न जी-20 के बैठक में बेगूसराय के लाल ने भारत मंडपम में पारंपरिक वाद्य यंत्रों का ऐसा कमाल दिखाया कि ना केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बल्कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सभी अतिथि मंत्र मुग्ध हो गए। यह कमाल किया है बेगूसराय के बिहट निवासी प्रो. संतोष ने। जी-20 की समाप्ति के बाद जानकारी मिलते लोग अपने लाल पर गर्व महसूस कर रहे हैं।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जी-20 के शिखर-सम्मेलन में देश-विदेश के मेहमानों एवं विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों एवं उनकी पत्नी का स्वातम भारत की पारंपरिक वाद्य-यंत्रों के माध्यम से रात्रिभोज के दौरान भारत की संगीत यात्रा का आयोजन कर बेगूसराय के लाल अंतरराष्ट्रीय बांसुरी वादक प्रो. संतोष कुमार के सह निर्देशन में सम्पन्न हुआ।
विदेशी मेहमानों के मनोरंजन के लिए एकमात्र सांस्कृतिक आयोजन भारत वाद्य दर्शनम् गांधर्व आतोद्यम यानी भारत की संगीत यात्रा से राष्ट्राध्यक्षों को प्रफुल्लित, आनंदित करने वाले इस कार्यक्रम का सह निर्देशन बेगूसराय जिला के बीहट जागीर टोला निवासी राजेन्द्र मालाकार के ज्येष्ठ पुत्र प्रोफेसर संतोष कुमार ने किया। जो वर्तमान में केन्द्रीय विश्वविद्यालय सिक्किम में संगीत के प्रोफेसर के रूप में दस वर्षों कार्यरत हैं।
उन्होंने संगीत में काशी हिन्दु विश्वविद्यालय से पीएचडी किया है। उन्होंने बोकारो में रहते हुए संगीत के अलावा एमएससी एवं आईटी भी किया। प्रो संतोष कुमार ने मंगलवार को बताया कि भारत मंडपम नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में वाद्य संगीत समूह भारत वाद्य दर्शनम में सहायक संगीत निर्देशक के रूप में भाग लेना एवं गुरुजी पंडित की सहायता करना सौभाग्य की बात है।
चेतन जोशी गांधर्व अतोद्यम के संगीत निर्देशन में जी-20 शिखर सम्मेलन भारत वाद्य दर्शनम का प्रदर्शन हुआ। जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली में दुनिया भर के 75 से अधिक कलाकार संगीत प्रदर्शन का अनुभव लिया। जो 34 हिंदुस्तानी, 18 कर्नाटक और 40 लोक वाद्ययंत्रों का उपयोग करके भारत की समृद्ध संगीत विरासत का प्रदर्शन था। इस संगीत कार्यक्रम की परिकल्पना संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने की।






