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अनिल दुजाना गैंग के कुख्यात बदमाश बलराम ठाकुर एनकाउंटर में ढेर

गाजियाबाद पुलिस ने कानून व्यवस्था को लेकर फिर दिए कठोर कार्यवाही के संकेत,बलराम ठाकुर का एनकाउंटर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपराधियों के लिए होश में रहने के संकेत

जन एक्सप्रेस,गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में शनिवार देर रात एक बड़े पुलिस एनकाउंटर में अनिल दुजाना गैंग का सक्रिय सदस्य और 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश बलराम ठाकुर को मुठभेड़ में मार गिराया । यह कार्रवाई गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की स्वाट टीम ने संयुक्त रुप से मिलकर किया । जो इलाके में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की दूसरी बड़ी सफलता है। हाल ही में बरेली शूटआउट कांड के बाद यह घटना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। त्यौहारी सीजन और शांति व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश के बाद पुलिस की सक्रियता बढ़ी है। जिसका असर अब कार्यवाही के रूप में दिखने लगा है । अपराधियों के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति से जनता में एकबार फिर कानून व्यवस्था को लेकर सरकार के प्रति सकारात्मक माहौल बना है ।
बदमाश बलराम ठाकुर से मुठभेड़ वेव सिटी थाना क्षेत्र के अंडरपास के पास शनिवार शाम करीब 8 बजे हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि बलराम ठाकुर रंगदारी वसूलने के लिए डासना क्षेत्र में आया हुआ है।क्राइम ब्रांच की टीम ने घेरा बनाकर बलराम को घेर लिया। सरेंडर करने की चेतावनी दी गई, लेकिन उसने पुलिस पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में बलराम को गोली लगी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। एनकाउंटर साइट से एक पिस्टल और कारतूस बरामद हुए । एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह और स्वाट टीम प्रभारी अनिल राजपूत के नेतृत्व में यह ऑपरेशन सफल रहा। पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने इसे “फुल एनकाउंटर” बताते हुए कहा कि यह उनके कार्यकाल का पहला बड़ा ऑपरेशन है।
*बलराम ठाकुर का अपराधिक इतिहास*
बलराम ठाकुर मूल रूप से बुलंदशहर के जहांगीराबाद का निवासी था। वह 2024 में मारे गए कुख्यात गैंगस्टर अनिल दुजाना का सक्रिय बदमाश था । अनिल दुजाना को यूपी एसटीएफ ने एनकाउंटर में ढेर किया था । अनिल दुजाना की मौत के बाद बलराम ने गैंग की कमान संभाली और पश्चिमी यूपी में दहशत फैलाने लगा। उसके खिलाफ कुल 40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे । कारोबारियों को फोन कर खुद को “अनिल दुजाना का गुरु” बताकर धमकी देकर वसूली करना उसका पेशा बना था । हाल ही में दो दिन पहले 18 सितंबर को गाजियाबाद के मदन स्वीट्स के मालिक ब्रह्म यादव से 50 लाख और लोहे के कारोबारी अभिषेक गोयल से 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगने की बात सामने आई थीं। पुलिस के अनुसार, बलराम लंबे समय से फरार था और लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था। उसके सिर पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

अनिल दुजाना गैंग

अनिल दुजाना जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कुख्यात गैंगस्टर था, को मई 2023 में मेरठ के टी.पी. नगर थाना क्षेत्र में एक एनकाउंटर में ढेर किया गया था। इस कार्रवाई को यूपी पुलिस की बड़ी सफलता माना गया, क्योंकि दुजाना के खिलाफ हत्या, लूट, रंगदारी और अपहरण जैसे 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे । अनिल दुजाना का असली नाम अनिल नागर था ।वह बागपत का रहने वाला था और 1990 के दशक से अपराध की दुनिया में सक्रिय था। वह सुंदर भाटी और काला जठेरी जैसे गैंग्स से जुड़ा था। बाद में उसने अपना गैंग बनाया और पश्चिमी यूपी में रंगदारी, मर्डर और जमीन कब्जाने जैसे अपराधों को अंजाम दिया । मई 2023 में, यूपी एसटीएफ ने मेरठ में दुजाना को घेर लिया। मुठभेड़ में उसने पुलिस पर गोली चलाई, जिसके जवाब में उसे मार गिराया गया। इस एनकाउंटर में एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ। दुजाना की मौत के बाद गैंग कमजोर हुआ, लेकिन कुछ सदस्य, जैसे हाल ही में मारा गया बलराम ठाकुर, गैंग को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहे थे। गाजियाबाद में 20 सितंबर 2025 को बलराम ठाकुर के एनकाउंटर ने गैंग को और कमजोर कर दिया।।

बलराम ठाकुर की उगाही की कॉल बनी मौत का कारण 
हबलराम ठाकुर की रंगदारी (उगाही) की कॉल ही उसकी मौत का कारण बनी। गाजियाबाद पुलिस को मिली खुफिया सूचना के आधार पर यह कार्रवाई हुई, जिसमें बलराम ठाकुर को एनकाउंटर में ढेर किया गया। बलराम ठाकुर ने 18 सितंबर 2025 को गाजियाबाद के दो व्यापारियों—मदन स्वीट्स के मालिक ब्रह्म यादव से 50 लाख रुपये और लोहे के कारोबारी अभिषेक गोयल से 25 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। उसने खुद को “अनिल दुजाना का गुरु” बताकर धमकी दी थी। पुलिस की नजर इन कॉल्स को पुलिस ने ट्रेस किया, जिससे बलराम की लोकेशन का पता चला। गाजियाबाद क्राइम ब्रांच और स्वाट टीम ने इसे गंभीरता से लिया, क्योंकि वह अनिल दुजाना गैंग का प्रमुख सदस्य था और इलाके में दहशत फैला रहा था।
क्यों बनी कॉल मौत का कारण?
खुफिया जानकारी: व्यापारियों ने रंगदारी की कॉल की शिकायत तुरंत पुलिस से की, जिससे पुलिस को बलराम की गतिविधियों का पता चला। ये कॉल्स उसकी लोकेशन ट्रैक करने में मददगार साबित हुईं।
पुलिस की सक्रियता: गाजियाबाद पुलिस पहले से ही दुजाना गैंग के बचे-खुचे सदस्यों पर नजर रख रही थी। बलराम की कॉल्स ने पुलिस को तुरंत हरकत में लाने का मौका दिया।
गैंग का अंत: बलराम ठाकुर, जो दुजाना की मौत के बाद गैंग की कमान संभाल रहा था, इन कॉल्स के कारण पुलिस के रडार पर आया और उसका अंत हुआ।

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