जौनपुर PWD में अफसरों के बीच टकराव, दोहरी FIR से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जन एक्सप्रेस /जौनपुर: जौनपुर लोक निर्माण विभाग (PWD) जौनपुर में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच उपजा विवाद अब केवल विभागीय मतभेद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक अनुशासन और कानूनी प्रक्रिया का विषय बन गया है। लेखाधिकारी और अधिशासी अभियंता के बीच चले आ रहे टकराव ने उस समय गंभीर रूप ले लिया, जब दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के आमने-सामने आने से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
पहले लेखाधिकारी की FIR, फिर अधिशासी अभियंता की पलटवार
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी राम मिलन यादव ने मारपीट और दबाव बनाए जाने का आरोप लगाते हुए अधिशासी अभियंता राजेंद्र वर्मा समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। लेखाधिकारी का आरोप था कि उन पर अनुचित दबाव बनाया गया और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
हालांकि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से लेखाधिकारी कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल फोन बंद मिला, जिससे स्थिति और अधिक अस्पष्ट हो गई।
अधिशासी अभियंता ने लगाए गंभीर आरोप
इसके बाद अधिशासी अभियंता राजेंद्र वर्मा ने भी शनिवार को अलग से प्राथमिकी दर्ज कराकर पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ कर्मचारियों का वेतन तकनीकी और विभागीय कारणों से एक-दो दिन के लिए रोका गया था।
अधिशासी अभियंता के अनुसार नियमों के विपरीत वेतन स्वीकृत कराने का दबाव बनाया गया, जिसे उन्होंने स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया। इसी बात को लेकर उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, जातिसूचक शब्द कहे गए और मारपीट की धमकी तक दी गई।
दोहरी FIR से बढ़ी विभागीय असहजता
दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच दर्ज हुई दो अलग-अलग प्राथमिकी ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विभाग के अंदरूनी माहौल में तनाव की स्थिति बनी हुई है और कर्मचारियों में भी असमंजस का माहौल देखा जा रहा है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद न केवल विभागीय छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि आम जनता में भी सरकारी कार्यप्रणाली को लेकर नकारात्मक संदेश देते हैं।
ठेकेदार संघ की एंट्री से उठा नया विवाद
इस पूरे मामले में उस समय नया मोड़ आ गया, जब लोक निर्माण विभाग ठेकेदार संघ के अध्यक्ष—जिन्हें स्थानीय स्तर पर “वीआईपी” के नाम से जाना जाता है—ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी राम मिलन यादव के पक्ष में समर्थन प्रकट किया।
यहीं से कई अहम सवाल खड़े होने लगे। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब विवाद पूरी तरह से विभागीय और अधिकारियों के बीच का है, तो ठेकेदार संघ की भूमिका इसमें क्यों सामने आई? वेतन भुगतान और आंतरिक प्रशासनिक निर्णयों में ठेकेदारों की दखलअंदाजी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पूर्व विवाद और लंबे समय से तैनाती पर सवाल
सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी राम मिलन यादव पूर्व में भी कुछ अधिकारियों के साथ व्यवहार को लेकर विवादों में रह चुके हैं। बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से एक ही पटल पर तैनात हैं और अब तक उनका स्थानांतरण नहीं किया गया है।
विभागीय जानकारों का कहना है कि किसी भी अधिकारी की एक ही स्थान पर लंबी तैनाती से कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और टकराव की स्थिति पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। यह विवाद अब केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें प्रशासनिक अनुशासन, राजनीतिक दबाव और विभागीय पारदर्शिता जैसे गंभीर पहलू भी जुड़ गए हैं।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरे प्रकरण में दोषी कौन है और लोक निर्माण विभाग में यह टकराव किन परिस्थितियों में उत्पन्न हुआ।






