बंद बाथरूम और खुलते सवाल पीलीभीत में दंपती की मौत ने फिर उठाया गैस गीजर की सुरक्षा पर सवाल

जन एक्सप्रेस /पीलीभीत: कोतवाली क्षेत्र स्थित मोहल्ला गुरुकुलपुरम में रविवार रात बाथरूम के भीतर पति-पत्नी की संदिग्ध मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। बंद दरवाजा, भीतर लगे गीजर और गैस सिलेंडर, और दम घुटने की आशंका—यह घटना उन तमाम घरों के लिए सबक है, जहां बिना वेंटिलेशन गैस गीजर का इस्तेमाल रोजमर्रा की आदत बन चुका है।हरजिंदर सिंह और उनकी पत्नी रेनू सक्सेना की मौत ने इलाके को झकझोर दिया। प्रारंभिक जांच में गीजर से गैस रिसाव की बात सामने आ रही है, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक यह है कि ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आने के बावजूद अब तक ठोस जागरूकता और सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए। बाथरूम जैसे संकरे और बंद स्थान में गैस गीजर का प्रयोग जानलेवा साबित हो सकता हैं। यह तथ्य अब किसी से छिपा नहीं है।घटना के हालात भावनात्मक रूप से भी झकझोरने वाले हैं। महिला के हाथ में फ्रैक्चर और पति द्वारा सहायता किए जाने की आशंका इस हादसे को और भी मार्मिक बना देती है। यह सिर्फ एक परिवार का उजड़ना नहीं, बल्कि समाज की उस लापरवाही का परिणाम है, जहां सुविधा को सुरक्षा से ऊपर रख दिया जाता है।प्रशासनिक स्तर पर भी यह सवाल खड़ा होता है कि क्या गैस गीजर और सिलेंडर के सुरक्षित उपयोग को लेकर पर्याप्त निरीक्षण और जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं? क्या किराये के मकानों में लगे ऐसे उपकरणों की समय-समय पर जांच होती है? जवाब अक्सर ‘नहीं’ में ही मिलता है।अब जरूरी है कि इस घटना को महज एक दुर्घटना मानकर भुला न दिया जाए। पुलिस की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट अपनी जगह है, लेकिन समाज और प्रशासन को मिलकर यह तय करना होगा कि ऐसे हादसे दोहराए न जाएं। वेंटिलेशन, सेंसर, नियमित जांच और जागरूकता ये सब अब विकल्प नहीं, आवश्यकता बन चुके हैं।पीलीभीत की यह घटना एक चेतावनी हैं। अगर अब भी नहीं चेते, तो अगली खबर किसी और घर से आ सकती है।






