उत्तराखंड

श्याम झूला पुल के पिलर पर मूर्ति को लेकर विवाद

रामशरण नौटियाल ने कहा- किसी भी कीमत पर नहीं लगने देंगे

विकासनगर। हरिपुर घाट पर पुराने पिलर के ऊपर मूर्ति लगाए जाने की तैयारी को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने मंगलवार को अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में इस मुद्दे पर दो-टूक रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी कीमत पर श्याम झूला पुल के पिलर के ऊपर मूर्ति नहीं लगने दी जाएगी। रामशरण नौटियाल का कहना है कि हरिपुर घाट पर जिस पुराने पिलर के ऊपर मूर्ति स्थापित करने की तैयारी की जा रही है, उसी स्थान पर पिछले करीब तीन वर्षों से श्याम झूला पुल बनाए जाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जरूरत और भविष्य की यातायात व्यवस्था को देखते हुए यहां झूला पुल का निर्माण बेहद महत्वपूर्ण है। इस मांग को लेकर वह पहले भी प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर 25 जुलाई को धरना भी दिया गया था, लेकिन करीब तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। उनके मुताबिक, अब मूर्ति स्थापना की तैयारी ने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

मूर्ति स्थापना का विरोध नहीं, स्थान को लेकर आपत्ति

रामशरण नौटियाल ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध मूर्ति स्थापित किए जाने से नहीं है। उनका कहना है कि आस्था और धार्मिक भावनाओं का वह सम्मान करते हैं, लेकिन मूर्ति के लिए जिस स्थान का चयन किया गया है, वह श्याम झूला पुल के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि मूर्ति किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन पुल निर्माण की संभावनाओं वाले स्थान पर स्थायी निर्माण किए जाने से भविष्य में विकास कार्य प्रभावित हो सकता है।

लोक पंचायत पर उठाए सवाल

रामशरण नौटियाल ने इस पूरे मामले में लोक पंचायत की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मूर्ति को लेकर विरोध नहीं किया जा रहा है, लेकिन श्याम झूला पुल का निर्माण भी क्षेत्र के लिए जरूरी है। उन्होंने लोक पंचायत से जुड़े लोगों से मूर्ति के लिए जुटाए गए चंदे और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मूर्ति की कीमत 25 लाख रुपये बताई जा रही है तो यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि किस-किस व्यक्ति या संस्था से कितना चंदा लिया गया और अब तक कुल कितनी धनराशि एकत्र हुई है।

मूर्ति की सामग्री को लेकर भी सवाल

रामशरण नौटियाल ने मूर्ति की वास्तविक सामग्री को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जनता को यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि मूर्ति प्लास्टिक की है या मेटल की। उनके मुताबिक, यदि मूर्ति की कीमत और निर्माण सामग्री को लेकर दावे किए जा रहे हैं तो उससे संबंधित जानकारी और खर्च का विवरण भी सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता के लिए चंदे की रसीदें, कुल संग्रहित राशि और मूर्ति की वास्तविक लागत जनता के सामने रखी जानी चाहिए। उनका कहना है कि ऐसा नहीं होने पर लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।

आस्था और विकास के बीच बढ़ा टकराव

हरिपुर घाट का यह मामला अब सिर्फ मूर्ति स्थापना तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर मां यमुना की प्रतिमा को क्षेत्र में धार्मिक और पर्यटन आकर्षण के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर रामशरण नौटियाल श्याम झूला पुल के निर्माण को क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी बता रहे हैं। ऐसे में आस्था, विकास और पारदर्शिता तीनों मुद्दे एक साथ सामने आ गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मूर्ति स्थापना से जुड़े लोग चंदे की राशि, रसीदों और मूर्ति की निर्माण सामग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करते हैं या नहीं रामशरण नौटियाल के “किसी भी कीमत पर नहीं” वाले बयान के बाद विवाद और गहराता दिखाई दे रहा है। अब नजर इस बात पर है कि मूर्ति स्थापना के पक्ष से इस पूरे मामले में क्या जवाब सामने आता है और श्याम झूला पुल के प्रस्ताव को लेकर प्रशासन एवं सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

https://youtu.be/WXvublqu3hA?si=F2X347r8jLd6rFln

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button